अलवर , मई 18 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र में इन दिनों बाघों और उनके शावकों की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बाघ और बाघिन अपने शावकों के साथ अलवर बफर वन क्षेत्र में घूमते हुए आबादी क्षेत्रों के समीप तक पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए सरिस्का प्रशासन ने आमजन, ट्रैकर्स और जंगल क्षेत्र में जाने वाले लोगों के लिए विशेष सलाह जारी की है।

वन विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार वर्तमान में सरिस्का के अलवर बफर वन क्षेत्र में कुल 11 बाघ-बाघिन विचरण कर रहे हैं। इनमें बाघिन एसटी-19 अपने चार शावकों के साथ बारा लिवारी, श्योदानपुरा, फायरिंग रेंज और जम्मूशाना क्षेत्र में सक्रिय है। वहीं बाघिन एसटी-2302 अपने दो शावकों के साथ बाला किला, अंधेरी चौड़ की होदी, किशन कुंड नाला, जयविलास और आसपास के जंगल क्षेत्रों में विचरण कर रही है।

वन विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि इन क्षेत्रों में पैदल घूमना, ट्रैकिंग करना या अवैध रूप से जंगल में प्रवेश करना मानव जीवन के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि शावकों के साथ रहने वाली बाघिनें बेहद आक्रामक और संवेदनशील होती हैं और किसी भी खतरे की आशंका पर हमला कर सकती हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरिस्का प्रशासन ने शहरवासियों, ग्रामीणों, पर्यटकों और ट्रैकिंग के शौकीनों से आग्रह किया है कि वे बिना अनुमति वन क्षेत्र में प्रवेश नहीं करें और राज्य सरकार और वन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की पालना करें।

वन अधिकारियों ने कहा कि सरिस्का में लगातार बढ़ रही बाघों की संख्या वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता है, लेकिन इसके साथ ही आमजन की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। खासतौर पर अलवर शहर से सटे बफर क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी को लेकर लोगों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल है।

वन विभाग के दल संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे हैं और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। अधिकारियों ने किसी भी क्षेत्र में बाघ दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने को कहा है।

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