अलवर , मई 02 -- राजस्थान में वन विभाग के तहत अलवर जिले में वन्यजीवों की जल स्रोत पद्धति से गणना एक मई से शुरू हो गई जो शनिवार शाम पांच बजे पूरी हो गई।

सहायक उपवन संरक्षक योगेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2026 की वन्यजीव गणना 'जल स्रोत पद्धति' से की गई। यह वार्षिक वन्यजीव गणना है, जो सरिस्का के सात रेंज में है। इसमें 50 दल बनाये गये हैं। करीब 105 वनकर्मी इसमें शामिल किए गए थे। इसमें शाकाहारी और मांसाहारी वन्य जीव के रूप में की गिनती की गई।

उन्होंने बताया कि उसमें सभी वन्य जीवों की गणना की गई और जल स्रोत पर यह गणना की गई। वन वन्य जीव गणना में लगे वन कर्मियों ने बताया कि एक प्रारूप है जिसमें सारी जानकारी भरी है। कौन सा शाकाहारी वन्य जीव यहां मौजूद है कौन सा मांसाहारी वन्य जीव मौजूद है। चूहड़ सिद्ध क्षेत्र में लव कुश वाटिका में लगे वन कर्मियों ने बताया कि यहां सभी तरीके के वन्य जीव देखे गए हैं, लेकिन अभी तेंदुआ और बाघ नहीं देखे गये हैं। न ही उनके पगचिन्ह दिखे हैं। यहां नीलगाय मोर एवं छोटे अन्य वन्य जीव दिखाई दिए और उनसे संबंधित सभी जानकारी इसमें भरी गई।

गणना के दौरान बाघ, तेंदुआ सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों का आंकलन जल स्रोतों पर किया गया। इसके लिए अलवर, बहरोड़, किशनगढ़बास, तिजारा, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और थानागाजी क्षेत्रों के वन अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई । कई रेंज के अधिकारी तैनात रहे।

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