अलवर , मई 22 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का में सबके लिए काल बनकर घूमने वाले बाघों को अब कुत्तों से खतरा हो उत्पन्न गया है। सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने शुक्रवार को बताया कि कुत्तों से बाघों में फैलने वाले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण जंगल में बाघ की जगह कुत्तों की निगरानी होने लगी है। उन पर नजर रखी जा रही है। साथ ही बाघ के क्षेत्र में घूमने वाले कुत्तों का टीकाकरण भी किया जायेगा।
श्री कटियार ने बताया कि सरिस्का में बाघों की संख्या 52 हो गयी है। लगातार यहां बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। जब बाघ जंगल में निकलता है, जंगली जानवर डर से दूर भाग जाते हैं और सभी में बाघ का खौफ रहता है, लेकिन बाघों पर इन दिनों एक वायरस का खतरा मंडरा रहा है। वह है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस।
उन्होंने बताया कि यह कुत्तों में होने वाली बीमारी से फैल रहा है। इसलिए बाघों को कुत्तों से बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं। बाघों के क्षेत्र में घूमने वाले कुत्तों के टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। कुत्तों को 6, 9 एवं 12 सप्ताह की आयु में सीडीवी टीका लगाया जायेगा। वर्ष में एक बार बूस्टर डोज भी लगाई जाएगी।
श्री सिंह ने कहा कि संक्रमित कुत्तों को बाघों से दूर रखा जाएगा। इस काम में जंगल क्षेत्र में बसे हुए ग्रामीणों की मदद ली जा रही है। सरिस्का प्रशासन की तरफ से बाघ के साथ आम कुत्तों की निगरानी की जा रही है। इसके लिए जंगल क्षेत्र में 400 से ज्यादा अलग-अलग जगहों पर कैमरे लगाये गये हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तालाब से बाघ पानी पीते हैं, उन जगहों को कुत्तों से दूर रखा जाएगा। वायरस के किसी भी तरह के लक्षण पाये जाते हैं, तो उसके लिए भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। कुत्तों से होने वाली इस बीमारी से बाघों को जानलेवा खतरा हो सकता है, इसलिए सावधानी बरती जा रही है। इसके लिए सभी रेंज अधिकारियों एवं वन रक्षकों को निर्देश दिये गये हैं।
मध्य प्रदेश के कान्हा बाघ अभयारण्य में पांच बाघों की मौत के बाद अब राजस्थान में अलवर के सरिस्का और सवाई माधोपुर का रणथम्भोर पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
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