अलवर , मई 26 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरणीय पर्यटन और पर्यटकों की सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को सरिस्का बाघ अभयारण्य प्रशासन द्वारा निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। उप वन संरक्षक बाघ परियोजना सरिस्का कार्यालय में हुए इस समझौते के तहत पहली परियोजना आधुनिक प्रकृतिक व्याख्या केंद्र (एनआइसी) के निर्माण की है। यह परियोजना वेदांता फाउंडेशन और राजस्थान बाघ संरक्षण फाउंडेशन (आरटीसीएफ) के सहयोग से करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जाएगी। करीब 4064 वर्गफुट क्षेत्र में बनने वाले इस केंद्र में 11 से अधिक अत्याधुनिक उपकरण और प्रणालियों की सुविधा होगी।
सूत्रों ने बताया कि इस केंद्र में सरिस्का के समृद्ध वन्यजीवों बाघ, तेंदुआ, कैराकल, गिद्ध और अन्य जीवों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इससे पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को सरिस्का की जैव विविधता को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
दूसरी परियोजना के तहत सरिस्का सम्मेलन केंद्र का विकास किया जाएगा। यह समझौता शाइन फाउंडेशन और आरटीसीएफ के बीच हुआ है। करीब एक करोड़ नौ लाख रुपए की लागत से बनने वाले इस केंद्र में 4580 वर्गफुट क्षेत्र में अत्याधुनिक सभागार, 68 सीटों वाला सम्मेलन कक्ष और सीसीटीवी निगरानी कक्ष बनाया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से सरिस्का में वन्यजीव संरक्षण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरणीय पर्यटन को नयी पहचान मिलेगी और पर्यटकों का अनुभव पहले से कहीं अधिक आधुनिक और आकर्षक बनेगा।
सूत्रों ने बताया कि सरिस्का में हो रहे ये विकास कार्य न केवल पर्यटन को मजबूती देंगे, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
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