जशपुर , मार्च 19 -- छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर में सरहुल सरना पूजा कार्यक्रम में शामिल होकर प्रदेश की जनजातीय परंपराओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान उन्होंने कई अहम घोषणाएं कीं और बताया कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित होने जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को हर वर्ग तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को आवास मिल चुके हैं। किसानों से किए वादे को निभाते हुए तेंदुपत्ता खरीदी जारी है और चरण पादुका योजना को पुनः शुरू किया गया है। उन्होंने महतारी वंदन योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में सीधे हस्तांतरित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, "एक हजार रुपये की राशि छोटी जरूर है, लेकिन इसके परिणाम बड़े हैं। ग्रामीण महिलाएं इस राशि से सिलाई मशीन खरीदकर स्वावलंबी बन रही हैं तो कई माताएं सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश कर अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित कर रही हैं।"कार्यक्रम में जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने स्थानीय बोली में सरहुल परंपरा की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि धरती माता को समर्पित यह पूजा वर्ष में तीन बार होती है - पहली वर्षा के लिए इंद्र देव की आराधना, दूसरी अच्छी फसल की कामना के लिए सरहुल पूजा और तीसरी फसल पकने के बाद धरती माता को धन्यवाद देने के लिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के जनजातीय परंपराओं से जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि विधायक बनने से पहले भी विष्णुदेव साय सरहुल नृत्य में शामिल होने आया करते थे।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उन दिनों को याद करते हुए क्षेत्र के आराध्य देवों के प्रति आभार जताया। उन्होंने भावुक होकर कहा, "खुड़िया रानी, भगवान बाला जी और गहिरा गुरु के आशीर्वाद से ही जशपुर का यह शिष्य आज राज्य के शीर्ष पद पर आसीन है।" उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आस्था और परंपराओं का सम्मान करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है और आने वाले दिनों में और भी कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएंगी।

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