पटना , अक्टूबर 09 -- जीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को न केवल रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं, बल्कि उनके पारंपरिक हुनर, स्थानीय उत्पादों और घरेलू उद्यमों को भी व्यापक बाजार उपलब्ध हो रहा है। इसी कड़ी में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पटना के ज्ञान भवन में 20 से 29 सितंबर तक आयोजित बिहार सरस मेला ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। दस दिनों तक चले इस मेले में 03 करोड़ 83 लाख रुपये का कारोबार हुआ। जबकि, साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण कर ग्रामीण उत्पादों, हस्तशिल्प, हस्तकरघा, पारंपरिक व्यंजनों और देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधता का आनंद लिया।
बिहार सरस मेला ग्रामीण महिलाओं के हुनर, स्वाद, स्वावलंबन और उद्यमिता का उत्कृष्ट संगम रहा। इस आयोजन ने यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उनके उत्पादों को उचित मंच, बाजार, पहचान और ग्राहकों तक पहुंच उपलब्ध कराने की है। सरस मेला इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। दिसम्बर माह में पुनः सरस मेला का आयोजन प्रस्तावित है।
पिछले वर्ष आयोजित सरस मेले में लगभग 3 करोड़ 68 लाख रुपये की खरीद-बिक्री हुई थी, जबकि इस वर्ष कारोबार बढ़कर 3 करोड़ 83 लाख रुपये पहुंच गया। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 लाख रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि ग्रामीण उत्पादों के प्रति लोगों के बढ़ते आकर्षण, महिला उद्यमियों की बेहतर भागीदारी और स्थानीय उत्पादों के लिए विकसित हो रहे बाजार का सकारात्मक संकेत है।
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