अमृतसर , मई 27 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने बरगाड़ी बेअदबी और बेहबल कलां-कोटकपूरा गोलीकांड मामलों में पंजाब सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाये हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने सिख समुदाय को इंसाफ दिलाने के बजाय दोषियों को बचाने की राजनीति की है।

प्रो. ख्याला ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं ने पूरी सिख कौम की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई थी, लेकिन आज तक आरोपियों को सजा न मिलना सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि एक जून 2015 को गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला से पावन स्वरूप चोरी हुआ था, जबकि 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन अंग बिखेरने की घटना सामने आई थी। इसके विरोध में प्रदर्शन कर रही संगतों पर 14 अक्टूबर 2015 को बेहबल कलां और कोटकपूरा में पुलिस फायरिंग हुई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी थी।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि थाना बाजाखाना में दर्ज मामलों की जांच के दौरान विशेष जांच दल (एसआईटी) ने डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह समेत 11 लोगों को आरोपी नामजद किया था। उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 295ए के तहत मुकदमा चलाने के लिए जरूरी मंजूरी की फाइल मई 2022 में भेजी गयी थी, लेकिन मान सरकार ने इसे करीब ढाई साल तक लंबित रखा और अक्टूबर 2024 में मंजूरी दी।

प्रो. ख्याला ने दावा किया कि डेरा सच्चा सौदा की राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य प्रदीप क्लेर ने अदालत में दिये बयान में कहा था कि कथित साजिश वाली बैठक में राम रहीम, हनीप्रीत और अन्य लोग मौजूद थे, लेकिन सरकार ने उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेअदबी और गोलीकांड से जुड़े मामलों को फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ पंजाब सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में उच्चतम न्यायालय में पंजाब सरकार के वकीलों ने डेरा पक्ष के वकीलों के साथ सहमति जताते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही रोकने संबंधी अंडरटेकिंग दी, जिसके बाद पिछले एक साल से मामले की सुनवाई तक नहीं हुई। मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने चुनावों के दौरान 24 घंटे में इंसाफ दिलाने का वादा किया था, लेकिन अब आम आदमी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह भी सरकार पर सवाल उठा चुके हैं।

प्रो. ख्याला के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में पंजाब में बेअदबी के 600 से अधिक मामले सामने आये, लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केवल 44 मामलों में ही दोष साबित हो सके हैं। उन्होंने कहा कि यह पंजाब की कानून व्यवस्था और सरकारों की विफलता को दर्शाता है।

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