नयी दिल्ली , अगस्त 10 -- संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को तोड़ने के लिए सरकार ने सोमवार को विपक्ष के सामने राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर लोक सभा में विस्तृत चर्चा कराने का प्रस्ताव किया और कहा कि चर्चा का जवाब गृहमंत्री अमित शाह देने को तैयार हैं।
संसद और संसद के बाहर सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष को भी जवाब सुनने के लिए तैयार रहना होगा।
सरकार की इस पेशकश के बावजूद सोमवार को भी दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हुई। विपक्ष दिल्ली में 20 जुलाई को काक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान राजधानी में युवाओं पर पुलिस कार्रवाई पर गृहमंत्री के बयान की मांग पर अड़ा है और संसद में हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है।
सरकार की ओर से गृहमंत्री की ओर से जवाब का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब मानसून सत्र में तीन सप्ताह की कार्यवाही में अधिकांश समय विपक्ष के हंगामे की भेट चढ़ चुका है। कुछ विधेयक विना चर्च के विपक्ष की नारेबाजी और बहिर्गमन के बीच पारित हुए हैं। इस सत्र में अब मात्र तीन दिन बचे हैं।
सोमवार को सरकार की ओर से पहले संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू और फिर शाम को भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जीपी नड्डा ने छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की पेशकश की । उन्होंने विपक्ष , खास कर कांग्रेस पर हमला भी बोला और कहा कि वह असल में चर्चा से भाग रही है ।
श्री रिजीजू ने लोक सभा में दो बार के स्थगन के बार अपराह्न दो बजे कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष के शोर-शराबे के बीच कहा, ' सरकार छात्रों के मुद्दे पर पूर्ण रूप से चर्चा कराने को तैयार है। हम एक-एक मुद्दे का जवाब देंगे।' उनके इस वक्तव्य पर पीठासीन जगदम्बिका पाल ने विपक्ष से सदन में व्यवस्था बनाये रखने की अपील करते हुए कहा, 'संसदीय कार्यमंत्री ने कह दिया है कि गृहमंत्री चर्चा का जवाब देने को तैयार । मैं आप (विपक्ष) से अपील करता हूं कि आप सदन में व्यवस्था बनाये और सदन चलने दें।"श्री पाल ने विपक्ष से कहा , ' मानसून सत्र के पहले तीन सप्ताह का अधिकांश समय बर्बाद हो चुका हैं, इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? आप का सौभाग्य है कि आप को लोगों ने चुन कर यहां भेजा है। उनके प्रति आप की जवाबदेही बनती है।"श्री रिजीजू ने सदन के बाहर भी संवाददाताओं से बातचीत में कहा , 'बीएसी ( सदन की कार्य-मंत्रणा समिति) की बैठक में सरकार ने साफ कह दिया है कि वह छात्रों के आंदोलन और उससे जुड़ी सभी गतिविधियों (घटनाओं) और बातों पर सदन में चर्चा कराने को तैयार है।" उन्होंने कहा, 'विपक्ष ने गृहमंत्री के बयान की मांग की थी। हमने स्पष्ट किया कि सरकार देश भर में छात्र आंदोलनों पर पूरी चर्चा कराने को तैयार है। गृहमंत्री एक-एक मुद्दे का जवाब देंगे पर आप को भी आश्वस्त करना पड़ेगा कि आप जवाब सुनेंगे।'श्री नड्डा ने इस मुद्दे पर आज शाम अपने निवास पर विशेष रूप से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन मेंकहा, " मैं श्री गांधी (राहुल) से स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि चर्चा से मत भागिए। हम सदन के अंदर हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।"उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा मापदंड अपनाने और गैर जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाकर देश की प्रगति को बाधित करने का आरोप लगाया । उन्होंने कहा, "गृह मंत्री हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। हमारा रुख हमेशा से यही रहा है और अब भी यही है। 'सदन को चलने दें।' अगर सदन चलता है, तो हम हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हैं।"उन्होंने कहा, , "मैं एक बार फिर श्री गांधी को चुनौती देता हूं कि सदन में आएं। हम चर्चा के लिए तैयार हैं और आपको मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।" उन्होंने कांग्रेस नेता पर असत्य बातें फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, " जंतर-मंतर पर न तो गोलियां चलाई गयीं और न ही वहां गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया।"भाजपा नेता ने कहा कि लोक सभा में विपक्ष के नेता श्री गांधी संसद और देश में चल रही चर्चाओं में हर दिन अपने मुद्दे बदलते रहते हैं। उनका मकसद चर्चा करना नहीं, बल्कि अफरातफरी फैलाना है। उन्होंने कहा कि जब संसद का सत्र शुरू हुआ, तो उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा, '' जब हम इसके लिए तैयार हो गए, तो उन्होंने मुद्दा बदलकर राम मंदिर ट्रस्ट का मामला उठा दिया। इसके बाद उन्होंने ज़ोर दिया कि गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर की घटना पर बयान दें। असल में, उनका इरादा सदन को काम करने से रोकना है। वह नहीं चाहते कि सदन चले। इसीलिए वह पिछले 15 दिनों से कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं और साथ ही जंतर-मंतर के मुद्दे पर चर्चा की मांग भी कर रहे हैं। "श्री नड्डा ने श्री गांधी पर विद्यार्थियों के मुद्दे पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा, "आज, जब यह तय हो चुका है कि जंतर-मंतर के मामले पर चर्चा होगी, तब भी वह जनता और देश को गुमराह कर रहे हैं। वह दावा कर रहे हैं कि जंतर-मंतर पर गोलियां चलीं, जबकि असल में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं।"इस बीच आज सदन के बाहर एक अन्य महत्वपूर्ण घटना क्रम के तहत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद) के आठ सांसदों ने संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की ।
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