मुंबई , जुलाई 23 -- सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों को जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शनकारियों से मिलना चाहिए। उन्होंने यह बात नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र के एक दिन बाद कही।
श्री हजारे ने मीडियाकर्मियों से कहा कि मतभेदों को सुलझाने के लिए हिंसा कभी भी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, "नरेन्द्र मोदी देश के एक प्रमुख और सम्मानित नेता हैं। उन्हें समझना चाहिए कि हिंसा कभी भी आगे बढ़ने का रास्ता नहीं है। जो कुछ भी हुआ वह गलत था। मैंने अपने जीवन में 22 भूख हड़तालें की हैं और कभी कोई हिंसक घटना नहीं हुई। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों को जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शनकारियों से मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की बात सुनने में कुछ भी गलत नहीं है।"प्रधानमंत्री को बुधवार को लिखे अपने पत्र में 89 वर्षीय गांधीवादी कार्यकर्ता ने कहा कि हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें 'दर्दनाक' थीं। लोकतंत्र में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और बल के अनावश्यक प्रयोग का कोई स्थान नहीं है।
श्री हजारे ने पत्र में लिखा कि प्रश्नपत्र लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों को लेकर युवाओं की चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे व्यापक सामाजिक संकट के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के किसी मंत्री का इस्तीफा देने से सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि इससे अन्य मंत्रियों को जवाबदेही का कड़ा संदेश जाएगा, जिससे उनका काम सुधरेगा।
गांधीवादी कार्यकर्ता का यह पत्र नीट परीक्षा की अनियमितताओं के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी द्वारा निकाले गए 'चलो संसद' मार्च के संदर्भ में था। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किए जाने के बाद हिंसा भड़क गई थी।
श्री हजारे ने कहा कि नीट परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं से छात्रों और अभिभावकों में चिंता पैदा हुई है। उन्होंने जोर दिया कि गड़बड़ियों और विफलताओं की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि लोकतंत्र में टकराव की तुलना में संवाद हमेशा बेहतर रास्ता होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह जनता की आवाज को विपक्ष की आवाज न समझे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें बातचीत, संवेदनशीलता और आपसी सम्मान के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
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