अमृतसर , मई 23 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने शनिवार को कहा कि सरकार के कानून की कमियों से संगतों को जागरूक करना प्रचारकों की बड़ी जिम्मेदारी है।
एडवोकेट धामी की अगुवाई में आज माझा क्षेत्र से संबंधित अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, तरनतारन और फिरोजपुर जिलों के प्रचारकों, ढाडी और कविशर सिंहों की विशेष बैठक एसजीपीसी कार्यालय स्थित सरदार तेजा सिंह समुद्री हॉल में आयोजित की गई। बैठक के दौरान पंजाब सरकार द्वारा पारित "जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026" में शामिल उन प्रावधानों पर चर्चा की गई, जिन्हें सिख संगतों को गुरबाणी से दूर करने वाला बताया गया। इसके साथ ही एसजीपीसी द्वारा 31 मई को बाबा बकाला साहिब में बुलाई गई पंथक कॉन्फ्रेंस में संगतों और गुरुद्वारा कमेटियों की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रचारकों की ड्यूटियां भी लगाई गईं।
बैठक को संबोधित करते हुए एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सरकार ने बेअदबी के दोषियों को सजा देने के नाम पर जो कानून बनाया है, उसमें "कस्टोडियन" शब्द के जरिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सेवा करने वालों को भी दोषी ठहराने की संभावना पैदा की गई है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह कानून श्री गुरु नानक देव जी के "घर-घर धर्मशाला" के सिद्धांत के खिलाफ है और इसका उद्देश्य सिख संगतों को गुरबाणी से दूर करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा इस बात से भी स्पष्ट होती है कि विधानसभा में पेश किए गए कानून का मसौदा अंग्रेजी भाषा में था और अब तक उसका पंजाबी में अनुवाद तक नहीं किया गया। उन्होंने जालंधर में हाल ही में हुए पावन गुटका साहिब की बेअदबी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि घटना की जानकारी देने वालों से सख्त पूछताछ कर संगतों में डर का माहौल बनाया जा रहा है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए इस कानून की कमियों के बारे में संगतों को जागरूक करना प्रचारकों की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने 31 मई को आयोजित पंथक कॉन्फ्रेंस में अधिक से अधिक संगतों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रचारकों से पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
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