जयपुर , सितम्बर 05 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने केन्द्र सरकार पर सरकारी संसाधनों का लाभ चुनिंदा लोगों को मिलने एवं अधिकांश नागरिक इससे वंचित रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इससे अमीर-गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है।

श्री यादव शनिवार को यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में पिछले कुछ समय से सरकारी संसाधन सीमित लोगों पर ही व्यय किए जा रहे है जिससे देश में अमीर और अमीर हो रहा है और गरीब व्यक्ति गरीब होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार यह आवाज उठायी जा रही थी कि सरकारी योजनाओं एवं सरकारी संसाधनों का लाभ देश के वंचित वर्ग को भी मिले किन्तु केन्द्र सरकार लगातार इसकी अनदेखी कर रही है। इस पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दें को प्रमुखता से उठाया और सरकार को नींद से उठाने का कार्य किया, दबाव के कारण केन्द्र सरकार को मजबूरी में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी जातिगत जनगणना के मुद्दे को लगातार सडक़ से संसद तक उठा रहे थे किन्तु सरकार द्वारा अनदेखी की जा रही थी। बाद में सरकार द्वारा अपने पितृ संस्था आरएसएस के मंशा के विरूद्ध जाकर जातिगत जनगणना कराने की घोषणा तो कर दी किन्तु सरकार के इस फैसले के पूरे होने तक सभी को आशंका प्रारम्भ से थी। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना का जब नोटिफिकेशन जारी हुआ तो भाजपा की केन्द्र सरकार की मंशा साफ तौर पर नजर आ रही थी क्योंकि माँग यह थी कि जातिगत जनगणना में नागरिकों से उनके वर्ग और जाति की जानकारी ली जायेगी लेकिन गत 22 जनवरी को जारी अधिसूचना में बिंदु संख्या 12 में यह पूछा गया कि क्या घर का मुखिया अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य वर्ग से है। इसी से यह शक यकीन में बदल गया कि केन्द्र सरकार जातिगत जनगणना के उद्देश्य को विफल करना चाहती है।

उन्होने कहा कि श्री राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने इस विषय पर केन्द्र सरकार को अनेक पत्र लिखे और आपत्ति दर्ज करायी कि नोटिफिकेशन में कहीं भी यह दर्ज नहीं है कि व्यक्ति किसी जाति या वर्ग से है उसकी जानकारी किस प्रकार ली जायेगी और जाति की जानकारी देने के संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया है किन्तु सरकार द्वारा अपने चिर-परिचित तरीके को अपनाते हुए मुद्दे की जवाबदेही से बचने के लिए मौन धारण कर लिया गया और कोई जवाब इन पत्रों का नहीं दिया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित