चंडीगढ़ , मई 30 -- पंजाब कैबिनेट की बैठक में शनिवार को दशकों पुराने आउटसोर्स और ठेका रोजगार प्रणाली को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 65,000 से अधिक कर्मचारियों को नियमित करने का रोडमैप मंजूर किया है।

सरकार के इस फैसले के तहत सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच सीधा नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित किया जाएगा तथा निजी ठेकेदारों की भूमिका समाप्त की जाएगी। इससे कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और नियमित सेवा में शामिल होने का स्पष्ट अवसर मिलेगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य के 51 विभागों में कार्यरत कुल 65,048 आउटसोर्स कर्मचारी इस नीति के दायरे में आएंगे। इनमें से 26,000 से अधिक कर्मचारियों को शुरुआती चरण में लाभ मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इन कर्मचारियों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष पंजाब की सेवा में लगाए हैं और अब सरकार उन्हें उनका अधिकार लौटाने जा रही है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों और सरकार के बीच कोई ठेकेदार नहीं होगा।

कैबिनेट ने पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सोनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल-2026 और पंजाब कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सोनल (एब्जॉर्प्शन अगेंस्ट सैंक्शनड वैकेंसीज) बिल-2026 को मंजूरी दी है। पांच वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले ग्रुप-सी और ग्रुप-डी आउटसोर्स कर्मचारी सीधे सरकारी अनुबंध पर लाए जाएंगे। जीवन और स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को तीन वर्ष की सेवा के बाद ही पात्रता मिलेगी। दस वर्ष की अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद कर्मचारियों को स्वीकृत नियमित पदों पर समायोजित करने पर विचार किया जाएगा।

नीति से बिजली, स्थानीय निकाय, सहकारी संस्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, जेल, कृषि, तकनीकी शिक्षा, लोक निर्माण विभाग और अग्निशमन सेवाओं सहित कई विभागों के कर्मचारी लाभान्वित होंगे। जोखिमपूर्ण श्रेणी में शामिल कर्मचारियों में फायर सर्विस कर्मी, पीएसपीसीएल लाइनमैन, सीवर और सफाई कर्मचारी, कचरा प्रबंधन कर्मी और शिकायत निवारण फील्ड स्टाफ शामिल हैं। नयी व्यवस्था के तहत वेतन सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा होगा। एजेंसियों या ठेकेदारों द्वारा कोई कटौती नहीं होगी। मातृत्व लाभ दिए जाएंगे। प्रति वर्ष 10 दिन का आकस्मिक अवकाश मिलेगा।कर्मचारियों को बायोमेट्रिक उपस्थिति और आईएचआरएमएस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। बिना कारण बताए किसी कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाया जा सकेगा।

कैबिनेट ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, मंत्री अमन अरोड़ा और मंत्री डॉ. बलजीत कौर की समिति का पुनर्गठन किया है। यह समिति वेतन संशोधन, पेंशन, अवकाश नकदीकरण तथा महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया मामलों की समीक्षा करेगी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पंजाब में सात विशेष अदालतों की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। मोहाली में 3 अदालतें, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में 1-1 अदालत स्थापित की जाएंगी। इनके संचालन के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के 7 पद तथा 63 सहायक कर्मचारियों के पद भी सृजित किए जाएंगे।

कैबिनेट ने पंजाब सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स-2007 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इससे राज्य की न्यायिक सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों को पदोन्नति और कैरियर उन्नति से संबंधित लाभ मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कई राज्य संविदा प्रणाली को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं पंजाब सरकार इस व्यवस्था को समाप्त कर कर्मचारियों को स्थायी रोजगार की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

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