अंबिकापुर , जून 22 -- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित देवेंद्र कुमारी सिंह देव शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कुछ चिकित्सकों पर सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी अस्पतालों में सेवाएं देने के आरोप लगे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम द्वारा आज जारी पत्र के अनुसार कुछ चिकित्सक ओपीडी और आईपीडी में निर्धारित दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों के उपचार और देखभाल की जिम्मेदारी छोड़कर वे निजी अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं, जिससे शासकीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

डॉ. मेश्राम ने इस संबंध में सरगुजा कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत कराया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि संबंधित चिकित्सकों को पूर्व में भी चेतावनी दी जा चुकी है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कोई चिकित्सक सरकारी सेवा अवधि में निजी संस्थानों में कार्य करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच छत्तीसगढ़ शासन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) स्तर से भी सरकारी चिकित्सकों को निर्धारित ड्यूटी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।

गौरतलब है कि सीएमएचओ के निर्देशों के बावजूद अंबिकापुर के कुछ निजी अस्पतालों में सरकारी चिकित्सकों की सेवाएं लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ चिकित्सक शासकीय अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करते हैं और बाद में वहीं उनका उपचार भी करते हैं।

इधर, सरगुजा जिले के सीएमएचओ ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों से शपथ पत्र जमा कराने की प्रक्रिया शुरू की है। शपथ पत्र में यह घोषणा करना अनिवार्य किया गया है कि संबंधित अस्पताल में कोई भी शासकीय चिकित्सक पूर्णकालिक, अंशकालिक अथवा ऑन-कॉल आधार पर प्रैक्टिस नहीं कर रहा है।

निर्देशों के अनुसार यदि किसी निजी अस्पताल में शासकीय चिकित्सक की प्रैक्टिस पाई जाती है तो संबंधित अस्पताल के लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही उक्त शर्त के पालन के आधार पर ही अस्पतालों को आयुष्मान योजनाओं के तहत मरीज भर्ती करने की पात्रता प्रदान की जाएगी।

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