भोपाल , मई 19 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश के सरकारी गोदामों में बड़ी मात्रा में गेहूं खराब होने के मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे सरकारी तंत्र की आपराधिक लापरवाही, किसानों का अपमान और गरीबों के साथ क्रूर मजाक बताया है।
श्री सिंह ने जारी बयान में कहा कि सरकारी गोदामों में एक लाख 32 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं सड़ जाना अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि किसान कर्ज, खाद-बीज की समस्या और मौसम की मार झेलकर कठिन परिश्रम से अनाज पैदा करता है, लेकिन सरकारी अमले की लापरवाही के कारण वही अनाज गोदामों में खराब हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से 2024 के बीच खरीदा गया गेहूं जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और सागर संभाग के गोदामों में खराब हो गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार अनाज के सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर नहीं है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो अनाज प्रदेश के गरीब परिवारों के उपयोग में आ सकता था, वह अब मानव उपभोग योग्य नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खराब हो चुके गेहूं का उपयोग अब शराब निर्माण, खाद और पशु आहार के रूप में किया जाएगा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें मामले को नियमित प्रक्रिया बताते हुए नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई थी। श्री सिंह ने सवाल उठाया कि सात वर्षों तक गेहूं की निकासी क्यों नहीं की गई और खुले भंडारण में उसे खराब होने के लिए क्यों छोड़ दिया गया।
श्री सिंह ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भंडारण और निकासी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया जाना चाहिए।
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