भोपाल/उज्जैन , मार्च 8 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्राचीन अवंतिका नगरी उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान सैनिक छावनियों से विजयी पताका और प्रतीक चिन्ह लेकर नगर में चल समारोह निकालकर उत्सव मनाया जाता था, जिसे बाद में गेर के नाम से जाना जाने लगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान श्री महाकाल का पूजन-अभिषेक करने के बाद मंदिर के सभा मंडप में रंगपंचमी के अवसर पर ध्वज चल समारोह में निकलने वाले भगवान वीरभद्र ध्वज और श्री महाकाल ध्वज के साथ शस्त्रों का विधि-विधान से पूजन किया।
उन्होंने कहा कि यह प्राचीन परंपरा आज भी कायम है और यह हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले चल समारोह (गेर) को निरंतर बनाए रखने के लिए सवा-सवा लाख रुपए की सहयोग राशि प्रदान की जाए।
इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में भगवान महाकाल का पूजन कर देश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। नंदी हाल में मंदिर के पुजारी-पुरोहितों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को भगवान महाकाल का अंगवस्त्र, प्रसाद और स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
रंगपंचमी के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव टॉवर चौक उज्जैन में आमजन के साथ फूलों की होली में भी शामिल हुए। इससे पहले वे सिंधी कॉलोनी से निकाली गई गेर (चल समारोह) में शामिल हुए, जहां नागरिकों ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने मंच से गुलाब के फूल बरसाकर लोगों के साथ होली खेली और कहा कि जीवन में असली रंग दिल के होते हैं, जो सम्मान, भाईचारे और देशभक्ति से भरे होते हैं। उन्होंने सभी को रंगपंचमी की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान मुख्यमंत्री और उपस्थित लोगों ने "ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का" गीत भी गाया। टॉवर चौक पर हजारों लोग रंगपंचमी के उत्साह में नाचते-गाते नजर आए और पूरे क्षेत्र में मालवी परंपरा का उल्लास दिखाई दिया।
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