पटना , जुलाई 24 -- बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने राज्य में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त, प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में शुरू किए गए समेकित मातृ देखभाल समन्वय (आईएमसीसी) मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगी। श्री पांडेय ने कहा की कि इससे गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण डिजिटल निगरानी, प्रसव पूर्व जांच, संभावित प्रसव तिथि एवं उच्च जोखिम गर्भावस्था की वास्तविक समय में निगरानी डिजिटल कमांड एवं नियंत्रण केंद्र के माध्यम से केंद्रीकृत अनुश्रवण एवं अनुवर्ती कार्रवाई, आशा, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय समेत अनेक लाभ होंगे।

श्री पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का जो व्यापक अभियान चलाया गया है, उसी की प्रेरणा से बिहार में भी स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और जनहितकारी योजनाओं का लगातार विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हुए, जिनका लाभ आज भी राज्य की जनता को मिल रहा है। वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार इन प्रयासों को नई गति और नई दिशा प्रदान कर रही है।

श्री पांडेय ने कहा कि 02 फरवरी 2026 को राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी निर्देश के आधार पर इस मॉडल का पायलट संचालन सीवान जिले के सीवान सदर, दरौंदा एवं गोरियाकोठी प्रखंडों में किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत अब तक लगभग 2,480 गर्भवती महिलाओं का डिजिटल पंजीकरण एवं निगरानी की जा चुकी है। डिजिटल कमांड एवं नियंत्रण से वंचित लाभार्थियों की निगरानी तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभवों के आधार पर इसे शीघ्र ही बिहार के सभी 38 जिलों में विस्तारित किया जाएगा। इससे राज्य की प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं समन्वित मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

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