नयी दिल्ली , सितंबर 21 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने कहा है कि अगर राष्ट्रीय समेकित कीट प्रबंधन प्रणाली (नेशनल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम/आईपीएमएस) को पूरी तरह से लागू कर दिया जाए, तो किसानों को बेचे जाने वाले नकली कीटनाशकों की समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

डॉ. चंद ने यह बात यहां क्रॉपलाइफ इंडिया द्वारा आयोजित 'एआई फॉर एग्रीकल्चर ट्रांसफॉर्मेशन' विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आईपीएमएस डेटाबेस, डीलर नेटवर्क के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता को पक्का करके ट्रैक-एंड-ट्रेस की सुविधा देता है। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वह एक ऐसा एआई-आधारित टूल या मोबाइल ऐप बनाए जो किसानों को कीटों की सही पहचान और उचित वक्सत पर सही मात्रा में कीटनाशक के इस्तेमाल करने में मदद करे।

सम्मेलन के दौरान आयोजित सीईओ पैनल में उद्योग जगत के प्रमुख दिग्गजों ने वर्ष 2035 तक कृषि-उद्योग के लिए अपना दृष्टिकोण भी पेश किया। क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के कार्यकारी चेयरमैन व प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा कि भविष्य में उद्योग में व्यावहारिक नवाचारों और रोबोटिक्स की बड़ी भूमिका देखने को मिलेगी। रैलिस इंडिया के प्रबंध निदेशक व सीईओ डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने बताया कि डिजिटल माध्यम काफी अहम हो जाएंगे और एआई उद्योग के अगले विकास चरण को परिभाषित करेगा। बायर क्रॉपसाइंस के सीओओ मोहन बाबू ने एआई, उन्नत बीज और जीन एडिटिंग जैसी तकनीकों को शामिल करते हुए एक समेकित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। बीएएसएफ एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस के बिजनेस डायरेक्टर गिरिधर रनुवा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब परिणाम-आधारित खेती की अहमियत बढ़ेगी। धानुका एग्रीटेक के प्रबंध निदेशक राहुल धानुका ने कहा कि देश में तैयार होने वाले एआई-आधारित समाधान मशीनीकरण को लोकतांत्रिक बनाएंगे।

सम्मेलन में क्रॉपलाइफ इंडिया ने यस बैंक के साथ मिलकर 'इनोवेशन इन क्रॉप प्रोटेक्शन सेक्टर' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार शहरीकरण के चलते 2050 तक शुद्ध बोया गया क्षेत्र 10 प्रतिशत तक घट सकता है। यह नहीं देश को वर्तमान में कीटों और बीमारियों के कारण हर साल करीब दो लाख करोड़ रुपये मूल्य की फसल उपज का नुकसान उठाना पड़ता है। रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण, किसान विस्तार सेवाएं मजबूत करने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने, सभी राज्यों में मान्य ' एक देश-एक लाइसेंस' और पांच वर्ष के रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन जैसे सुधारात्मक कदमों की वकालत की गई है।

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