मुंबई , अप्रैल 07 -- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मंगलवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय को बताया कि उसके पूर्व जोनल निदेशक समीर वानखेड़े के खिलाफ चल रही जांच नवाब मलिक के कहने पर शुरू नहीं की गयी, बल्कि यह गुमनाम शिकायतों के आधार पर की जा रही है।
एनसीबी ने न्यायमूर्ति अजेय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाटा की खंडपीठ के समक्ष दायर हलफनामे मेंयह स्पष्ट किया। एजेंसी के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के उप महानिदेशक विशाल सनप ने श्री वानखेड़े द्वारा लगाये गये आरोपों को खारिज किया।
गौरतलब है कि एनसीबी ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले (जून 2020) और एक अन्य नाइजीरियाई नागरिक से जुड़े मामले की जांच में कथित अनियमितताओं को लेकर वानखेड़े के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नवाब मलिक उनसे नाराज थे, क्योंकि वानखेड़े ने उनके दामाद समीर खान को एक ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। हलफनामे में कहा गया कि यह जांच दो विशिष्ट गुमनाम शिकायतों के आधार पर शुरू की गयी थी और इन शिकायतों का नवाब मलिक से कोई संबंध नहीं है।
श्री वानखेड़े की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव चव्हाण ने अदालत में जवाबी हलफनामा दाखिल करदावा किया कि उनके मुवक्किल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2021 में क्रूज ड्रग्स मामले में आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद श्री वानखेड़े के खिलाफ कई मामले दर्ज किये गये। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, नवंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच एनसीबी ने वानखेड़े को आठ नोटिस जारी किये, जिनमें उन्हें जांच का नेतृत्व कर रहे उप महानिदेशक संजय सिंह के समक्ष पेश होने को कहा गया।
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