मुंबई , जून 09 -- पूर्व सांसद एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता समीर भुजबल ने मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार) के भीतर हाल ही में मचे राजनीतिक घमासान पर अपनी चुप्पी तोड़ी।

यह विवाद पार्टी द्वारा उनके चाचा एवं वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल के बजाय राजेंद्र जैन को राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकित करने के फैसले के बाद शुरू हुआ था।

श्री भुजबल ने एक बयान जारी करके स्पष्ट किया कि वह पार्टी नेतृत्व से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें आगामी विस्तार के दौरान राज्य कैबिनेट में शामिल करने के संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व और महायुति गठबंधन से आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा, "मैं बिल्कुल भी नाराज नहीं हूं। मंत्री पद को लेकर मेरी मुख्यमंत्री और महायुति के अन्य नेताओं के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है। शपथ ग्रहण प्रक्रिया के लिए समय की कमी के कारण यह पहले नहीं हो सका, लेकिन मुझे पक्का भरोसा दिया गया है कि कैबिनेट विस्तार या फेरबदल होने पर मुझे अवसर दिया जायेगा।"अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए पूर्व सांसद ने पार्टी के लिए अपनी 25 वर्षों की सेवा को रेखांकित किया, जिसमें 1999 से जमीनी स्तर पर संगठन बनाना, कार्यक्रमों की योजना बनाना और पर्दे के पीछे से पार्टी के मामलों को संभालना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, "मेरा लक्ष्य कभी राज्यसभा जाना नहीं था। यह श्री छगन भुजबल थे जिन्होंने संसद जाने की इच्छा व्यक्त की थी। मेरी लंबे समय की वफादारी को देखते हुये, मुझे अवसर मिलने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिये।"ये टिप्पणियां वरिष्ठ नेता छगन भुजबल द्वारा सार्वजनिक रूप से व्यक्त किये गये असंतोष के बाद आई हैं। उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार द्वारा खाली की गयी राज्यसभा सीट के लिए पार्टी द्वारा श्री प्रफुल्ल पटेल के करीबी सहयोगी श्री राजेंद्र जैन को नामांकित करने के बाद, श्री छगन भुजबल ने नेतृत्व के पदों के लिए पार्टी के मानदंडों पर खुलेआम सवाल उठाये थे। वरिष्ठ नेता ने पहले कहा था, "जिस तरह अन्य नेताओं के बच्चों और रिश्तेदारों को मंत्री पद या संसद और विधान परिषद में सीटें दी जाती हैं, उसी तरह मेरे परिवार के साथ भी उचित व्यवहार होना चाहिए।"श्री समीर भुजबल के स्पष्टीकरण के बाद अब भुजबल परिवार ने थोड़ा नरम रुख अपना लिया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर करीब से नजर रख रहे हैं कि क्या महायुति गठबंधन अगले कैबिनेट विस्तार के दौरान इन वादों को पूरा करेगा। श्री राजेंद्र जैन के नामांकन और हाल ही में प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुनील तटकरे के बेटे अनिकेत तटकरे को दी गयी विधान परिषद की सीट ने पार्टी के वरिष्ठ वफादारों के लिए उचित प्रतिनिधित्व के संबंध में आंतरिक बहस को हवा दे दी थी।

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