जयपुर , अप्रैल 29 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा की समितियों को अधिक प्रभावी एवं क्रियाशील बनाए जाने की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए समितियों को जवाबदेही बनाने एवं बैठकों में सदस्यों की उपस्थिति बढ़ाने के साथ ही परीक्षणों की संख्या में वृद्धि किये जाने के लिए समितियों के सभापतियों से बुधवार को यहां चर्चा की।

इस अवसर पर श्री देवनानी ने सभापतियों से कहा कि विधानसभा की समितियां महत्वपूर्ण होती है। इनको प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने अपेक्षा जाहिर की कि समितियों को सशक्त बनाने के लिए कमियों का निराकरण करे और कार्यों को परिणाम तक पहुंचाएं। श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा की वित्तीय समितियों के माध्यम से वित्तीय प्रबंधन पर पूरी तरह से मॉनिटरिंग होती है। जनलेखा समिति द्वारा अंकेक्षण कार्य किया जाता है।

उन्होंने कहा कि राजकीय उपक्रम समिति, विभिन्न उपक्रमों की कार्यप्रणाली की निगरानी करती है। अनुसूचित जाति कल्याण समिति, अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति, पिछडे वर्ग के कल्याण सबंधी समिति, अल्पसंख्यकों के कल्याण संबंधी समितियों के माध्यम से इन वर्गों की समस्याएं और इनके निमित रखे गए बजट पर चर्चा की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रश्न एवं सन्दर्भ समिति, पर्यावरण संबंधी समिति आदि विषयों की समितियां भी अपने- अपने क्षेत्रों की समीक्षा करती है। इससे प्रशासनिक सुधार भी होता है। श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा की समितियां सदन का लघुरूप होती है। इन समितियों को अधिक सक्रिय किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभापतियों को संबंधित समितियों में सदस्यों की उपस्थिति को आवश्यक रूप से सुनिश्चित करना होगा। श्री देवनानी ने कहा कि सदस्यों को समितियों के कार्यों में प्रभावी रूप से शामिल करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सदस्य समिति की बैठक के समय का बैठक के कार्यों में पूरा सदुपयोग करे। उन्होंने समिति के कार्यों में प्रत्येक सदस्य की रुचि बढ़ाने की आवश्यकता जताई।

उन्होंने कहा कि समितियों को उनसे संबंधित विभागों के विभिन्न मामलों में परीक्षणों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए समितियां विभागों के विषयों का चुनाव करें और विभागों को उन मामलों से संबंधित ब्यौरों की वांछित जानकारी आवश्यक रूप से उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित करें। श्री देवनानी ने कहा कि एक महीने में दो परीक्षण आवश्यक रूप से किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विभागीय अधिकारी समय बढ़ाने का अनुरोध करें, तो उस परीक्षण में दो दिन से अधिक समय नहीं दिया जाना चाहिए।

बैठक में उपस्थित सभापतियों ने समितियों को सक्रिय बनाने के लिए सुझाव दिए। श्री देवनानी के समक्ष समितियों की बैठक 10 दिन करने, मानदेय तीन हजार रुपये किये जाने, घटना व दुर्घटनाओं पर समिति को संज्ञान लेने, एक जिले में एक महीने में एक बार जाकर प्रत्यक्ष समीक्षा किये जाने, बैठकों का समय प्रथम पारी का प्रातः पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न दो बजे तक और द्वितीय पारी का समय अपराह्न ढाई बजे से सायं साढ़े पांच बजे करने, परीक्षण में विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी की शामिल किये जाने संबंधी सुझाव आए।

बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, समितियों के सभापति कालीचरण सराफ, राजेन्द्र पारीक, अर्जुन लाल जीनगर, फूल सिंह मीणा, हरि सिंह रावत, केसाराम चौधरी, नरेन्द्र बुडानिया, रमेश खींची, कल्पना देवी, कैलाश चन्द्र वर्मा और जितेन्द्र गोठवाल मौजूद थे।

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