न्यूयार्क , सितंबर 24 -- विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और 'विकास के अधिकार पर संधि' को जल्द से जल्द अपनाने का समर्थन किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में 'विकास के अधिकार पर घोषणा' की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने यह बात कही।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया एक पोस्ट में कहा कि सचिव सिबी जॉर्ज ने अपने संबोधन में सतत विकास, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समावेश और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 1986 में अपनाई गई विकास के अधिकार पर घोषणा यह स्थापित करती है कि विकास का अधिकार एक अविच्छेदनीय मानव अधिकार है। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति और सभी लोग आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में भाग लेने, योगदान देने और उसका आनंद लेने के हकदार हैं, जिससे सभी मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं को पूरी तरह से महसूस किया जा सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित