बैतूल , जुलाई 18 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समयबद्ध रूप से जारी किए जाने वाले जाति, स्थाई निवास और अन्य प्रमाण पत्रों के वितरण में देरी से आवेदकों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित होने से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और रोजगार की तलाश में जुटे आवेदकों को बार-बार लोक सेवा केंद्र और एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार लोक सेवा केंद्रों में आवेदन जमा होने के बाद संबंधित प्रकरण एसडीएम कार्यालय, नगर पालिका, नगर परिषद अथवा जनपद पंचायत को भेजे जाते हैं। नियमों के अनुसार तय समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी किए जाने चाहिए, लेकिन कई मामलों में आवेदन लंबे समय तक लंबित पड़े हैं। आवेदकों का आरोप है कि लोक सेवा केंद्र और संबंधित कार्यालयों के बीच समन्वय की कमी के कारण आवेदन समय पर संबंधित शाखाओं तक नहीं पहुंच रहे हैं या उनकी प्रभावी समीक्षा नहीं हो रही है।
राठीपुर निवासी एक आदिवासी युवक ने बताया कि उसने डिजिटल जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन आवेदन में त्रुटि बताकर उसे निरस्त कर दिया गया। समस्या के समाधान के लिए वह दो बार एसडीएम कार्यालय पहुंचा, फिर भी उसका मामला हल नहीं हो सका।
इसी तरह राहुल डोंगले ने बताया कि उन्होंने एक जुलाई को गरीबी रेखा संबंधी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। लोक सेवा केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार नौ जुलाई को आवेदन एसडीएम कार्यालय भेज दिया गया था, लेकिन 17 जुलाई तक कोई सूचना नहीं मिली। कार्यालय में पूछताछ करने पर आवेदन प्राप्त नहीं होने की बात कही गई। बाद में लोक सेवा केंद्र के रिकॉर्ड के आधार पर खोजबीन करने पर आवेदन संबंधित शाखा में मिला, जिससे विभागीय समन्वय और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जाति और स्थाई प्रमाण पत्रों के लिए पंचायतों को अधिकृत किया गया है, जहां से आवेदन जनपद पंचायत और लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से आगे भेजे जाते हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका और नगर परिषद स्तर पर प्रक्रिया पूरी होती है। इसके बावजूद दोनों क्षेत्रों में प्रमाण पत्र जारी करने में विलंब की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
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