पटना , अक्टूबर 28 -- लित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान में नगर विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के कनीय अभियंताओं के लिए आयोजित 28 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हो गया। समापन समारोह में नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सह संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष नीतीश मिश्रा ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए।

मंत्री श्री मिश्रा ने इस अवसर पर अभियंताओं से अपने कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता, बेहतर योजना और आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने शहरीकरण की बढ़ती जरूरतों और नई तकनीकों के मद्देनजर नगर विकास एवं आवास विभाग में हो रहे बदलावों तथा सैटेलाइट टाउनशिप जैसी नई योजनाओं पर चर्चा की।

नगर विकास मंत्री श्री मिश्रा ने कहा कि बिहार के सभी शहरों में सिग्नेचर सड़क बनाने पर उनका ध्यान है।उन्होंने कहा कि बिहार में शहरीकरण 11 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 33 फीसदी है। वहीं दक्षिण के राज्यों में 50 प्रतिशत तक शहरीकरण है। उन्होंने रिपोर्ट लेखन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ योजनाओं की प्रभावी निगरानी, सही दस्तावेजीकरण और बेहतर कार्यप्रणाली भी जरूरी है। उन्होंने हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित अखिल भारतीय अर्बन कॉन्क्लेव का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें देशभर के नगर विकास विभागों के मंत्री, सचिव और अधिकारियों ने भाग लिया था। ऐसे आयोजन शहरी विकास के क्षेत्र में नए विचारों, अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकारी सेवा में किसी अधिकारी या अभियंता का कार्यकाल सीमित होता है। इसलिए उन्हें अपने कार्यकाल में ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनका सकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक दिखाई दे और जिन्हें लोग वर्षों तक याद रखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सड़क या नाले का निर्माण कर देना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहतर हो, योजनाएं सही ढंग से तैयार की जाएं और उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे।उन्होंने एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आधारभूत संरचनाओं का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि वे एक-दूसरे से जुड़ी हों और नागरिकों की वास्तविक जरूरतों को पूरा कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाए रखने, अच्छे कार्यों और अनुभवों को साझा करने तथा तकनीक के माध्यम से कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव सह संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि किसी भी लोक सेवक के जीवन में प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रशिक्षण से न केवल ज्ञान और कौशल में वृद्धि होती है, बल्कि व्यक्तित्व में निखार आता है और कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, कौशल और मूल्यों की बुनियादी नींव को मजबूत करने के लिए निरंतर सीखना आवश्यक है। नए अनुभवों और प्रशिक्षण से सरकारी कर्मियों को बदलते नियमों, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणालियों की जानकारी मिलती है। उन्होंने आईएएस अधिकारियों के प्रशिक्षण का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं पर खर्च होने वाला धन जनता और करदाताओं का पैसा है। इसलिए प्रत्येक राशि का उचित उपयोग, पारदर्शी लेखा-संधारण और समय पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) प्रस्तुत करना जरूरी है। वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही से ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), के प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग को सीखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। वहीं संस्थान के रजिस्ट्रार सुधांशु शेखर ने भी अभियंताओं से प्रशिक्षण का लाभ लेने की अपील की। संचालन डॉ. प्रीति सिंह ने किया।

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