बैतूल , सितंबर 21 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बारिश के पानी को रोककर भूजल स्तर बढ़ाने और जलसंकट के स्थायी समाधान के लिए सभी विकासखंडों में सिरपुर पैटर्न पर आधारित एक-एक मिनी वाटरशेड विकसित किए जाएंगे।
इसके लिए उपयुक्त स्थानों का चयन कर अक्टूबर तक जल संरक्षण कार्य शुरू करने के निर्देश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में अधिकारियों को दिए।
बैठक में विधायक के आग्रह पर परियोजना निदेशक, जल संरक्षण एवं सिरपुर पैटर्न विशेषज्ञ एस.बी. खानापुरकर ने महाराष्ट्र के सिरपुर में जल संरक्षण के प्रयोग और बैतूल में इसकी संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि स्थानीय भूगर्भीय संरचना, ढाल और जल प्रवाह का वैज्ञानिक अध्ययन कर जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएं तो बारिश के पानी को बहने से रोककर भूजल पुनर्भरण बढ़ाया जा सकता है।
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि सिरपुर पैटर्न का उद्देश्य वर्षा जल को तेजी से बहने से रोकना, उसे जल संरचनाओं में संग्रहित करना और एक्विफर यानी भूजल भंडार का पुनर्भरण करना है। इसके तहत मौसमी नालों और जलधाराओं में उपयुक्त स्थानों पर चेक डैम बनाए जाने के साथ जलग्रहण क्षेत्र में समोच्च जल-संरक्षण खाई (कंटूर कंट्रोल ट्रेंच) जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञ ने बताया कि भूगर्भीय अनुकूलता के अनुसार चेक डैम के बीच 200 से 300 मीटर की दूरी रखी जा सकती है। प्रत्येक जलधारा की ढाल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संरचनाएं विकसित करने से जल संचयन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इससे सिंचाई और पेयजल के साथ औद्योगिक जरूरतों के लिए भी पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बैठक में नयेगांव, जगदर और परसोड़़ी भोगीटेढ़ा में सिरपुर पैटर्न से लाभान्वित किसानों के अनुभव भी साझा किए गए। जल संरक्षण कार्यों से इन क्षेत्रों में हुए बदलाव और किसानों को मिले लाभों पर चर्चा हुई।
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