पटना , जुलाई 30 -- बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता इस भावना में निहित है कि मत अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र और समाज के हित का लक्ष्य एक होना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को विधानसभा के पांच दिवसीय मॉनसून सत्र में विधायको का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र का यह पवित्र सदन लोकतांत्रिक व्यवस्था का सर्वोच्च मंच है, जहाँ जनता की अपेक्षाओं, आकांक्षाओं एवं समस्याओं का संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप समाधान खोजा जाता है। यह केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि जनभावनाओं, लोककल्याण और संविधान की आत्मा का सजीव प्रतीक है। यहाँ होने वाला प्रत्येक विचार-विमर्श करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है । इसलिए यह सदन संवाद, शालीनता, मर्यादा और उत्तरदायित्व का सर्वोच्च मंच है।

डॉ. कुमार ने अपने प्रारंभिक संबोधन में उन सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई दी, जिन्होंने हाल ही में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड), गयाजी में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम में संसदीय प्रक्रिया, विधायी एवं बजटीय कार्य, समिति की कार्य प्रणाली, नेभा और भविष्य की संभावनाएं, सदस्यों के विशेषाधिकार एवं प्रोटोकॉल, संसदीय आचरण तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश एवं राज्य के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए थे। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस प्रबोधन कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान और अनुभव इस सदन की कार्यवाही को और अधिक सार्थक, अनुशासित तथा जनोन्मुख बनाने में सहायक होंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ने ऋग्वेद के मंत्र "आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।" की चर्चा की और कहा इस श्लोक का आशय है सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार हमारे पास आएं। उन्होंने उपनिषदों की चर्चा की और कहा कि हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर तथा मृत्यु से अमरता की ओर ले चलिए।

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