लखनऊ , सितंबर 17 -- उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे, सरकारी नौकरियों, वक्फ संपत्ति, ऑनलाइन भुगतान और कानून-व्यवस्था से जुड़े आरोपों पर पलटवार करते हुए गुरुवार को कहा कि अखिलेश सत्ता हासिल करने के लिए व्याकुल हैं और इसी कारण उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं।
श्री राजभर ने कहा कि सड़कें बनती हैं तो समय के साथ टूटती भी हैं और उनके खराब होने पर संबंधित ठेकेदार से दोबारा निर्माण कराया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव को सड़कों की इतनी चिंता है तो उन्हें अपने कार्यकाल में बनी सड़कों की स्थिति भी देखनी चाहिए। ऑनलाइन भुगतान पर चुंगी लगाए जाने के अखिलेश यादव के आरोप पर राजभर ने कहा कि उन्हें इसकी सही जानकारी नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि इसका भार 95 प्रतिशत लोगों पर नहीं पड़ेगा, जबकि पांच प्रतिशत सक्षम लोगों पर इसका असर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस तरह की बातों के जरिए जनता को गुमराह कर रहा है। सीएए-एनआरसी का उल्लेख करते हुए राजभर ने कहा कि उस समय विपक्षी दलों ने आंदोलन किए और दिल्ली का शाहीन बाग चर्चा में रहा, लेकिन कानून लागू होने के बाद भी तीन साल से अधिक समय में किसी मुसलमान को देश से बाहर नहीं निकाला गया।
वक्फ संपत्तियों के मामले में राजभर ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सपा, बसपा और कांग्रेस की सरकारों के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियां हजारों रुपये में लेकर उन पर होटल और मॉल बनाए गए तथा कुछ संपत्तियां बेच दी गईं। उन्होंने कहा कि अब संपत्तियों को 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज किए जाने की व्यवस्था से ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
सरकारी नौकरियों को लेकर राजभर ने दावा किया कि योगी सरकार के कार्यकाल में 9.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। इसके विपरीत उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय नौकरियों में धन का लेनदेन होता था। उन्होने दावा किया कि उस समय विज्ञापन निकलने के बाद पांच, दस और 15 लाख रुपये तक की बोली लगती थी और सूची तैयार होने के बाद उसे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की स्वीकृति मिलती थी।
अखिलेश यादव के सत्ता में आने पर अधिक नौकरियां देने के दावे पर तंज कसते हुए राजभर ने पूछा, ''कहां से देंगे, अपने घर से?'' उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में एक विशेष बिरादरी को आगे बढ़ाने का काम किया गया।
कानून-व्यवस्था को लेकर अखिलेश के आरोपों पर राजभर ने कहा कि सपा सरकार के दौर को लोग ''गुंडों की सरकार'' कहते थे। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जब वहां हिंसा हो रही थी, उस समय सैफई में कार्यक्रम चल रहे थे। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान बड़ी संख्या में दंगे हुए, कर्फ्यू लगे और लोगों की जान गई।
श्री राजभर ने कहा कि उस समय लगभग हर जिले में माफिया का प्रभाव था और गैंगवार की घटनाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और कानून का राज स्थापित हुआ है। अखिलेश यादव के मंदिर निर्माण संबंधी बयान पर भी राजभर ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि एक ओर मंदिर बनवाने की बात की जाती है और दूसरी ओर मौलाना के साथ नमाज पढ़ने की तस्वीरें सामने आती हैं। राजभर ने सवाल किया कि मंदिर निर्माण और नमाज, दोनों को लेकर सपा की राजनीति का रुख आखिर क्या है।
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