नयी दिल्ली , जून 16 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सतत और समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा है कि विश्व को दाता-प्राप्तकर्ता संबंधों से आगे बढ़कर एकजुटता और समानता पर आधारित साझेदारियों की ओर बढ़ना चाहिए।
श्री मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के शहर एवियन में 52 वें जी-7 शिखर सम्मेलन में "नयी साझेदारियाँ स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र में भाग लिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से बढ़ती हुई परस्पर जुड़ी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाने के लिए 'विश्वास' के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया को दाता-प्राप्तकर्ता संबंधों से आगे बढ़कर एकजुटता और समानता पर आधारित साझेदारियों की ओर बढ़ना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि भारत ने सदैव 'मानवता प्रथम' दृष्टिकोण का पालन किया है, जो भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और एक पेड़ माँ के नाम जैसी पहलों में परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के प्रति भारत की दृष्टि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के शाश्वत दर्शन पर आधारित है - अर्थात् सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सतत समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध है।
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