नयी दिल्ली , अक्टूबर 27 -- राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने, वित्तीय संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने और प्रौद्योगिकी साझा करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण का क्षरण, जैव विविधता में कमी, संसाधनों की कमी, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा तथा बढ़ती असमानताएं मानवता के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। संयुक्त राष्ट्र की सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2026 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पर्याप्त आंकड़ों वाले 139 लक्ष्यों में से केवल 15 प्रतिशत ही वर्ष 2030 तक हासिल करने की सही दिशा में हैं।
श्री हरिवंश ने मंगलवार को यहां आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव गरिमा, आर्थिक अवसरों, सामाजिक न्याय और बेहतर भविष्य से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कानून बनाने, बजट पर निगरानी रखने और सरकारों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के जरिए संसदें सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की विकास की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, के सिद्धांत पर आधारित है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के साथ भारत समृद्ध और टिकाऊ राष्ट्र बनाने तथा वैश्विक विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री हरिवंश ने युवाओं की भागीदारी को भी जरूरी बताते हुए 'विकसित भारत युवा संसद' जैसी पहलों का उल्लेख किया।
उप सभापति ने जोर देकर कहा कि विकासशील देशों को राष्ट्रीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुसार विकास के लिए पर्याप्त संसाधन और नीतिगत स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। सतत विकास के लिए वित्त की उपलब्धता, तकनीक साझा करने और 'साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और क्षमताओं' के सिद्धांत का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संसदीय कूटनीति, बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और सामूहिक प्रयासों से वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए समावेशी और समृद्ध दुनिया बनाई जा सकती है।
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