हरिद्वार , जुलाई 24 -- उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला सड़क सुरक्षा समिति (डीआरएससी) की बैठक मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार में आयोजित हुई।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में हुई बैठक में परिवहन, पुलिस, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा और चिकित्सा विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने जनपद के 25 चिन्हित ब्लैक स्पॉट पर तत्काल सुधारात्मक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। जहां सड़क संकेतक, रोड मार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, स्पीड ब्रेकर या अन्य सुरक्षा उपायों की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्य पूरे किए जाएंगे।
उन्होंने परिवहन विभाग और पुलिस को ओवरस्पीडिंग, नशे में वाहन चलाने, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट तथा अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित और सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया।
बैठक में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने विभागीय प्रवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी से जून 2026 के दौरान मोटर वाहन अधिनियम के तहत कुल 19,523 चालान किए गए। इनमें बिना हेलमेट, ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग, सीट बेल्ट का उपयोग न करने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल, गलत दिशा में वाहन चलाने, नो पार्किंग और ड्रिंक एंड ड्राइव जैसे मामलों में कार्रवाई शामिल रही।
मुख्य विकास अधिकारी ने सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सभी विभागों का साझा लक्ष्य दुर्घटनाओं और जनहानि में उल्लेखनीय कमी लाना होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग को सभी विद्यालयों में सड़क सुरक्षा, हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व तथा यातायात नियमों के पालन को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थी स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार एवं समाज को भी प्रेरित कर सकें।
बैठक में सड़क सुरक्षा ऑडिट, दुर्घटना संभावित स्थलों पर चेतावनी संकेतक लगाने, रिफ्लेक्टिव मार्किंग को मजबूत करने तथा सड़क सुरक्षा संबंधी जनजागरूकता कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। एनएचएआई को राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा चिकित्सा विभाग को सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के त्वरित उपचार के लिए सभी अस्पतालों का पैनल तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि घायलों को निकटतम अस्पताल में बिना विलंब उपचार मिल सके और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
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