नासिक , सितंबर 22 -- महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास नासिक जिले के खिरपाड़ा-वांगनपाड़ा गांव निवासी 22 वर्षीय युवक की हालत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए गुजरात के मणि स्थित स्वास्थ्य केंद्र तक कपड़े के झोलेनुमा सहारे में उठाकर (स्लिंग) के सहारे ले जाना पड़ा।

बताया जा रहा है कि भास्कर पांडु तुरे पिछले छह-सात दिनों से बीमार थे। महाराष्ट्र की तरफ सबसे नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) लगभग 24 किलोमीटर दूर है, जबकि गुजरात का मणि गांव से केवल पांच किलोमीटर दूर है और वहां आम तौर पर लगभग 16 मिनट में पहुंचा जा सकता है।

गांव और मणि के बीच हालांकि नदी 'पार' करनी पड़ती है, जिससे वहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है। जब भास्कर की हालत गंभीर हो गई, तो पांडु तुरे, बालू तुरे, रमेश इजल, प्रभु इजल, लाशी निंबारे, पांडु राठौड़, चैत्य और उनकी मां ने उन्हें कपड़े के झोलेनुमा सहारे में उठाकर पथरीले एवं मुश्किल रास्तों से होते हुए इलाज के लिए गुजरात के मणि पहुंचाया।

यह घटना महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर स्थित गांवों में सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी कनेक्टिविटी की कमी को उजागर करती है।

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