दरभंगा , मई 02 -- बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ.आर एन चौरसिया ने शनिवार को कहा कि संस्कृत में वर्णित संस्कार, संस्कृति, जीवनदर्शन, आचार संहिता और मानवीय मूल्य विकसित भारत के मूल आधार हैं।

प्रोफेसर चौरसिया ने स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में संचालित मण्डन मिश्र चेयर तथा डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में "विकसित भारत के निर्माण में संस्कृत की भूमिका" विषय पर संस्कृत विभाग में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार की अध्यक्षता करते कहा कि रोचक एवं अनुभव परक श्रेष्ठ ज्ञान-विज्ञान का अक्षय खजाना संस्कृत देश की पहचान पुनर्स्थापित कराने में सक्षम है।

श्री चौरसिया ने कहा कि संस्कृत-ज्ञान उच्च जीवन जीने का बेहतरीन तरीका है, जिसके उत्थान से ही विकसित भारत का निर्माण होगा, क्योंकि यह प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक विकास से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत 'राष्ट्र की प्राणशक्ति' है, जिसका पुनर्जागरण भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में पूर्ण सक्षम है। यह भारतीय ज्ञान-परंपरा की मूल भाषा है, जो राष्ट्रीय भावनाओं का वाहक भी है। भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत सिर्फ अतीत की धरोहर ही नहीं, बल्कि विकसित भारत की मजबूत नींव भी है। संस्कृत भारत की वैश्विक पहचान का प्रतीक है।

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