फरीदाबाद , सितंबर 07 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि आज़ादी के बाद हमारे देश की संसद ने कई कानूनों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर बनाने का काम किया।

श्री बिरला ने राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से यहाँ आयोजित दो दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम फॉर वूमेन लेजिस्लेटर्स - ''शी इज ए चेंज मेकर'' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जो महिला नेतृत्व से अछूता हो।

उन्होंने कहा कि लोगों की कठिनाइयों को दूर करने और उनकी आकांक्षाओं को साकार करने में महिला नेतृत्व की अहम भूमिका है। भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान अवसर और समानता का अधिकार दिया है तथा महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी संविधान में कई प्रावधान किये गये हैं। आजादी के बाद संसद ने अनेक कानूनों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और राज्य से लेकर केंद्र तक विधायिका में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य विधानसभाओं से लेकर संसद तक महिलाएं हमेशा प्रखरता के साथ अपने विचार रखती रही हैं। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं में एक समय महिलाओं की भागीदारी करीब 15 से 20 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गयी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक होगी। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व को मजबूत करना केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक और समावेशी विकास के लिए भी आवश्यक है।

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