कोलकाता , जून 05 -- तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती दरार और अंतर्कलह की अटकलें अब तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठने लगा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के विधायक दल में जो उथल-पुथल शुरू हुई थी, क्या वह लोकसभा में उसके संसदीय दल तक भी पहुंच सकती है।

इस विवाद को नया मोड़ बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार के बयानों से मिला है, जिन्होंने एक बार फिर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए तर्क दिया कि मतदाताओं ने टीएमसी की नीतिगत विफलताओं और शासन की कमियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाया है। उनकी यह टिप्पणी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने दो जून को एस्प्लेनेड के वाई-चैनल पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, अपने बेटे को विधानसभा का टिकट न मिलने से नाराज होकर असहमति वाले बयान देने के लिए बिना नाम लिए एक पार्टी नेता की आलोचना की थी।

राजनीतिक विश्लेषकों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस टिप्पणी को घोष दस्तीदार के संदर्भ में देखा था। शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से इसका जवाब देते हुए चार बार की सांसद घोष ने लिखा, "क्या आपको लगता है कि एक राजनीतिक परिवार से आने वाली चार बार की सांसद, जो ममता बनर्जी के साथ रही हैं और चार दशकों से तानाशाही के खिलाफ लड़ रही हैं, केवल अपने बारे में सोचेगी? यह (चुनाव परिणाम) नीतियों के खिलाफ एक फैसला और शासन की विफलता है।" उनके इस पोस्ट को सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो को दिए गए करारे जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

सुश्री दस्तीदार ने स्कॉटिश कवि चार्ल्स मैके की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ भी साझा कीं, जिसका सार यह था कि जो लोग कर्तव्य के संघर्ष में लगे रहते हैं, उनके दुश्मन बनना तय है और जिस व्यक्ति का कोई विरोधी नहीं है, उसने शायद जीवन में कुछ खास हासिल नहीं किया है।

छात्र राजनीति के दिनों से ही सुश्री बनर्जी की पुरानी सहयोगी रहीं सुश्री दस्तीदार को हाल ही में लोकसभा में टीएमसी संसदीय दल के मुख्य सचेतक के पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह श्रीरामपुर के सांसद कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी दी गई है। पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए लिखा था कि चार दशकों की वफादारी का आखिरकार यह "इनाम" मिला है। यह विवाद तब और गहरा गया जब उन्होंने 26 मई को नदिया के कल्याणी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई एक प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया था।

इसके बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें केंद्रीय सुरक्षा कवर प्रदान किए जाने के फैसले ने भाजपा से उनकी नजदीकी की अटकलों को हवा दे दी है। ये सारे घटनाक्रम टीएमसी विधायक दल के भीतर खुली बगावत के बीच सामने आ रहे हैं।

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