नयी दिल्ली , अप्रैल 18 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति तथा आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कृषि सचिव और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था, राज्यों की तैयारियों तथा संभावित प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से निपटने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी। इसमें कहा गया है कि इस समीक्षा बैठक में श्री सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के किसान हित सर्वोपरि है और संभावित अल नीनो प्रभाव को लेकर सरकार तैयार है।
बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने की संभावना व्यक्त की है और मौसमी वर्षा देशभर में दीर्घकालीन औसत के लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, हालांकि अंतिम आकलन मई के अंत में जारी होगा।
श्री चौहान ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी पूर्वानुमान को गंभीरता से लेते हुए सरकार पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है और किसानों को किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास, बेहतर जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के कारण संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बैठक में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा गया कि वर्तमान समय में देश के जलाशयों का जलस्तर संतोषजनक स्थिति में है और समग्र भंडारण सामान्य से बेहतर है। उपलब्ध आकलन के अनुसार जलाशयों का भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत पर है, जिससे खरीफ मौसम में सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। इस आधार पर बैठक में यह आकलन व्यक्त किया गया कि संभावित अल नीनो प्रभाव के बावजूद कृषि क्षेत्र पर इसका असर पहले की तुलना में अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है। विशेष रूप से बेहतर जल उपलब्धता, वैज्ञानिक सलाह और समय पर हस्तक्षेप के कारण खेती अब पहले की अपेक्षा अधिक सक्षम बनी है।
श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी राज्य किसी भी विपरीत मौसम की स्थिति से निपटने के लिए पूर्ण तैयारी रखें और जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ सूखा-सहनशील किस्मों को बढ़ावा दिया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीज उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है तथा आकस्मिक स्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व की व्यवस्था भी रखी गई है।
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