लखनऊ , अगस्त 5 -- उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को न्यायिक जांच आयोग ने पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम बताया है। आयोग ने अपनी 369 पृष्ठों की रिपोर्ट बुधवार को राज्य सरकार को सौंप दी, जिसे गुरुवार को विधानसभा के पटल पर रखा गया।
रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी (सपा ) के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, विधायक इकबाल महमूद के पुत्र सुहेल इकबाल समेत कई लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
आयोग के अनुसार, मस्जिद के सर्वे को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिससे लोगों में यह धारणा बनी कि मस्जिद पर कब्जा किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सांसद जिया-उर-रहमान बर्क ने 19 और 22 नवंबर 2024 को दिए अपने भाषणों में सर्वे और मस्जिद के संबंध में ऐसे बयान दिए, जिनके कारण लोगों में तनाव बढ़ा।
आयोग के अनुसार, इन भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई। आयोग के मुताबिक, 24 नवंबर को मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए, जिसके बाद पथराव, गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हुईं। हिंसा में चार लोगों की मृत्यु हुई, जबकि 28 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें सात पुलिसकर्मियों को गोली लगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मृतकों को लगी गोलियां पुलिस की नहीं थीं। उपद्रवियों ने पुलिस के हथियार और अन्य सरकारी सामान लूटने का भी प्रयास किया। जांच आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को प्रभावी, संयमित तथा परिस्थितियों के अनुरूप बताया है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए न्यायालयों के आदेशों का सम्मान करने तथा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया है।
संभल हिंसा की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग की रिपोर्ट अब विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
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