संतकबीरनगर , सितंबर 09 -- उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के गजपुर गांव में करीब 50 एकड़ में धान की फसल खराब होने की शिकायत किसानों ने जिलाधिकारी आलोक कुमार से की है। किसानों ने गांव की एक दुकान से खरीदे गए धान के बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, प्रभावित खेतों का पंचनामा तैयार कराने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
बुधवार को जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देने वाले किसानों का नेतृत्व सुधीर सिंह ने किया। किसानों का कहना है कि उन्होंने गांव की एक दुकान से धान का बीज खरीदा था। बुआई के बाद बीज का जमाव हुआ और फसल की रोपाई भी की गई, लेकिन बाद में फसल का अपेक्षित विकास नहीं हुआ और खेतों में खड़ी फसल खराब होने लगी।
किसानों के अनुसार, बीज के अलावा खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भी काफी खर्च हुआ है। फसल खराब होने से लागत निकलना मुश्किल हो गया है और उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। उन्होंने प्रभावित खेतों का मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक नुकसान का आकलन कराने तथा उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।
शिकायत पर जिलाधिकारी ने जिला कृषि अधिकारी को टीम गठित कर मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. बृजेश चौधरी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-बी (कृषि), विकासखंड खलीलाबाद ने शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर खेतों का निरीक्षण किया था। विभागीय जांच में बीज का जमाव और उसकी रोपाई होना पाया गया।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान खेतों में खर-पतवार अधिक पाया गया। साथ ही समय-समय पर फसल प्रबंधन और कीटनाशी प्रबंधन नहीं किए जाने के कारण फसल की बढ़वार प्रभावित होने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों ने फसल बीमा कराया है तो उपज की क्षतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर 14441 पर शिकायत दर्ज कराकर नियमानुसार लाभ लिया जा सकता है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले आईजीआरएस (1076) पर भी शिकायत की थी, जिसके बाद कृषि विभाग के अधिकारी और बीज निरीक्षक गांव पहुंचे थे। किसानों ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उनके खेतों की वास्तविक स्थिति और शिकायत का सही तरीके से आकलन नहीं किया गया।
पूर्व जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट किसानों ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट निरस्त कर किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में नए सिरे से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित खेतों का मौके पर निरीक्षण कर पंचनामा तैयार कराने तथा संबंधित बीज कंपनी की भी जांच कराने को कहा है। किसानों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही फसल खराब होने की वास्तविक वजह सामने आएगी और बीज की गुणवत्ता में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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