संतकबीरनगर , जुलाई 04 -- उत्तर प्रदेश में संतकबीरनगर जिले की सत्र न्यायालय ने खलीलाबाद में फर्जी फर्म बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो मुख्य अभियुक्तों की जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता और भारी-भरकम वित्तीय धोखाधड़ी को देखते हुए अभियुक्त सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी निवासी हरीनगर घंटाघर नई दिल्ली और अजीत कुमार निवासी कैलाश पूरी एक्सटेंशन पालन कालोनी नई दिल्ली की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। दोनों अभियुक्तों को पुलिस पूर्व में दिल्ली से गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य कर विभाग (खण्ड-1, संतकबीर नगर) के सहायक आयुक्त अरविन्द कुमार द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, जालसाजों ने 'सर्वश्री यादव इंटरप्राइजेज' नाम की एक फर्जी फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया था। इस फर्म का प्रोपराइटर रंजीत सिंह यादव को दिखाया गया था और इसका मुख्य व्यापारिक पता फायर स्टेशन के पास, खलीलाबाद सिटी रोड दर्ज था।
जांच में यह सामने आया कि इस फर्म द्वारा भौतिक रूप से न तो कोई माल खरीदा गया और न ही बेचा गया। गिरोह ने केवल कागजी हेरफेर और फर्जी इनवॉइस (बिल) के जरिए करीब 18.96 करोड़ रुपये की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट अन्य फर्मों को पास-आन की व 18,96,80,190 रुपये की फर्जी आईटीसी खुद क्लेम (दावा) की। दस्तावेजों के अनुसार, इस गिरोह ने फर्जी बिलिंग के जरिए फर्मों को करोड़ों का अवैध लाभ पहुँचाया था तथा फर्जी इनवॉइस के माध्यम से फर्जी बिक्री दिखाकर बोगस आईटीसी ट्रांसफर की गई। अभियुक्तगण सौरभ अग्रवाल और अजीत कुमार के अधिवक्ताओं ने अदालत में जमानत के लिए दलीलें पेश कीं कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।
जमानत प्रार्थना पत्र का जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने विरोध किया और कहा कि अभियुक्तगण द्वारा किया गया अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है जिसमें आर्थिक व्यवस्था को क्षतिग्रस्त करने का कार्य किया गया है। अभियुक्तगण जमानत पर रिहा होने पर साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और फरार हो सकते हैं।अभियुक्तगण इस सुनियोजित आर्थिक अपराध और मास्टरमाइंड सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य हैं, जिन्होंने सरकारी खजाने को सीधे तौर पर भारी नुकसान पहुँचाया है। सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी।
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