संतकबीरनगर , जुलाई 23 -- उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित कर बाढ़ सुरक्षा एवं राहत तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

अपर जिलाधिकारी ने बताया कि बैठक में बाढ़ अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता, ड्रेनेज खंड ने नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अब तक की गई तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रेनेज विभाग द्वारा नदियों के जलस्तर तथा तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तटबंधों पर नियमित निगरानी बनाए रखने और संभावित कटान वाले क्षेत्रों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत चौपालों का आयोजन किया जाएगा तथा राहत शिविरों और राहत कैंपों के लिए चिन्हित स्थानों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाएगा, जिससे आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

अपर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों का पूर्व चिन्हांकन करने, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित कराने तथा प्रतिदिन प्रातः 10 बजे तक बाढ़ की दैनिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा चिन्हित नौकाओं का सत्यापन, विद्युत पोल एवं तारों को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने तथा आपातकालीन मार्गों का चिन्हांकन कर उनका विवरण तैयार रखने के भी निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी विभाग अपनी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर लें। साथ ही सर्पदंश की घटनाओं की रोकथाम के लिए गांवों में चौपाल आयोजित कर लोगों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए।

अपर जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सतर्कता, जिम्मेदारी और समन्वय के साथ करें। उन्होंने राहत शिविरों के संचालन से जुड़े सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि बाढ़ एक आकस्मिक प्राकृतिक आपदा है, इसलिए सभी बिंदुओं पर पहले से तैयारी और निरंतर निगरानी आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ संभावित गांवों का नियमित भ्रमण कर स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करें और उनकी समस्याओं की अग्रिम जानकारी लेकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें, ताकि आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

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