संतकबीरनगर , सितंबर 7 -- उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले की पहचान बखिरा झील, जिसे मोती झील के नाम से भी जाना जाता है, को विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना अब गति पकड़ने लगी है। जिलाधिकारी आलोक कुमार के नए प्रस्ताव पर पर्यटन निदेशालय ने कार्रवाई शुरू कर दी है। परियोजना के लिए करीब 15 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है, जिसकी खरीद के लिए 13.74 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। पर्यटन निदेशक (ईको-टूरिज्म) पुष्प कुमार ने दो सितंबर 2026 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर परियोजना के लिए उपलब्ध भूमि का ब्योरा मांगा है। प्रशासन को यह जानकारी देनी होगी कि कितनी सरकारी भूमि उपलब्ध है और कितनी भूमि निजी काश्तकारों से खरीदने की आवश्यकता होगी। इसके आधार पर भूमि खरीद की जरूरत और संभावित व्यय का आकलन किया जाएगा।
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि बखिरा झील के विकास के लिए उन्होंने 19 जून 2026 को करीब 42 करोड़ रुपये की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी थी। इसमें भूमि खरीद के लिए 13.74 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पर्यटन निदेशालय द्वारा भूमि की उपलब्धता की रिपोर्ट मांगे जाने के बाद परियोजना की अगली प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि 25 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैजनाथ धाम से बखिरा झील को ईको-टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित कर उसे वैश्विक पहचान दिलाने की बात कही थी। इसके बाद पर्यटन विभाग की सक्रियता से परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है।
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