नयी दिल्ली , अक्टूबर 17 -- केंद्र सरकार ने संघ शासित प्रदेशों में कोर्ट फीस स्टाम्प नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने से जुड़े नए नियम अधिसूचित किए हैं। इनमें निर्दिष्ट गैर-धोखाधड़ी वाले कुछ उल्लंघनों के लिए 10,000 रुपये तक का जुर्माना, अपील करने के लिए 30 दिन का समय और अपील का निपटारा 60 दिनों में करने का प्रावधान है।

विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा 16 अक्टूबर को अधिसूचित 'केंद्र शासित प्रदेश कोर्ट फीस (जुर्माने का निर्धारण और अपील) नियम, 2026', आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गए हैं। कोर्ट फीस अधिनियम, 1870 की धारा 34(1) के तहत जारी ये नियम शिकायत दर्ज करने, जांच करने, जुर्माना लगाने और फैसलों को चुनौती देने के लिए एक औपचारिक व्यवस्था स्थापित करते हैं।

अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के तहत, स्टाम्प बेचने के लिए नियुक्त कोई व्यक्ति यदि बिना किसी धोखाधड़ी के इरादे के तय नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। धोखाधड़ी के इरादे से किए गए उल्लंघनों के लिए अलग दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।

संबंधित केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक, ऐसे उल्लंघनों पर फैसला लेने के लिए उपायुक्त, उपजिलाधिकारी या उसके समकक्ष रैंक के अधिकारियों को नियुक्त कर सकते हैं। अधिसूचना के अनुसार, कोई भी राजस्व अधिकारी, लाइसेंस प्राप्त विक्रेता या ऐसा व्यक्ति जिसे किसी उल्लंघन की जानकारी है, वह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से, स्पीड पोस्ट द्वारा या स्वयं जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है।

न्याय निर्णायक अधिकारी को शिकायत मिलने के 30 दिनों के भीतर 'कारण बताओ नोटिस' (शो-कॉज नोटिस) जारी करना होगा। इस नोटिस में संबंधित व्यक्ति को अपना जवाब देने के लिए, नोटिस मिलने की तारीख से कम से कम 30 दिनों का समय दिया जाना चाहिए। यदि सुनवाई आवश्यक समझी जाती है, तो जवाब मिलने के 15 दिनों के भीतर नोटिस जारी किया जा सकता है। अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना कोई जुर्माना नहीं लगाया जा सकता है।

यदि संबंधित व्यक्ति नोटिस मिलने के बावजूद उपस्थित नहीं होता है या अपना पक्ष नहीं रखता है, तो अधिकारी लिखित में कारण दर्ज करने के बाद, उस व्यक्ति की अनुपस्थिति में (एक-तरफा) आगे की कार्यवाही कर सकता है।

नियमों के अनुसार, न्याय निर्णायक अधिकारियों को यह प्रयास करना चाहिए कि वे शुरुआती नोटिस जारी होने के तीन महीने के भीतर कार्यवाही पूरी कर लें। जुर्माना तय करते समय, अधिकारी कोर्ट फीस या स्टाम्प की राशि, उल्लंघन की अवधि और बार-बार होने की स्थिति, जनता को हुई परेशानी, प्रभावित विक्रेताओं की संख्या और अनुचित तरीके से प्राप्त किए गए किसी भी वित्तीय लाभ पर विचार कर सकते हैं।

जुर्माने के प्रत्येक आदेश में उल्लंघन का विवरण, निष्कर्ष के कारण, जुर्माने की राशि और भुगतान की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। यदि जुर्माना नहीं चुकाया जाता है, तो इसे भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूला जा सकता है। जिस व्यक्ति को निर्णय से शिकायत है, वह आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। यदि कोई ठोस कारण बताया जाता है, तो अपीलीय प्राधिकरण देरी से की गई अपील को भी स्वीकार कर सकता है।

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