मथुरा , जून 12 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ब्रज प्रांत द्वारा परखम स्थित दीनदयाल उपाध्याय गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का शुक्रवार को प्रकट समारोह के साथ समापन हो गया। प्रशिक्षण वर्ग में ब्रज प्रांत के विभिन्न जिलों से आए 146 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। समारोह में स्वयंसेवकों ने योग, व्यायाम, आसन, दंड, नियुद्ध तथा घोष के साथ सामूहिक शारीरिक प्रदर्शन कर अनुशासन और प्रशिक्षण का परिचय दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवा ध्वज आरोहण के साथ हुआ।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने कहा कि "संघ को समझना है तो संघ की शाखा में आना पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि जैसे गुड़ और चीनी के स्वाद का अंतर बिना चखे नहीं समझा जा सकता, उसी प्रकार संघ के कार्य को समझने के लिए शाखा से जुड़ना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के 96 हजार से अधिक स्थानों पर संघ का कार्य चल रहा है, लेकिन समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए और अधिक कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य नियमित साधना पर आधारित है तथा 100 वर्ष पूरे होने के बावजूद संघ आज भी युवा ऊर्जा के साथ कार्य कर रहा है।
महेंद्र जी ने पंच परिवर्तन के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, पॉलीथिन मुक्त जीवन, मातृभाषा के प्रयोग, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, नागरिक कर्तव्यों के पालन तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव समाप्त कर राष्ट्रहित में कार्य करना आवश्यक है।
मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मनोज के.एस. यादव ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने देश में अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने सेना और संघ के कार्यों में अनुशासन एवं राष्ट्र समर्पण की समानता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, महिलाओं एवं संतों ने सहभागिता की। इस अवसर पर जिला संघ चालक दास बिहारी, वर्ग सर्वाधिकारी राजकुमार जी, प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी, वर्ग पालक महावीर जी, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, विधायक पूरन प्रकाश सहित संघ एवं सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। संत समाज की ओर से स्वामी देव स्वरूपानंद, जगद्गुरु भैया दास महाराज, आचार्य शैल बिहारी दास महाराज समेत कई संतों की उपस्थिति भी प्रमुख रही।
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