ब्यूनस आयर्स , अप्रैल 06 -- जब रविवार की रात को पूरा भारत सो रहा था, तब एमएमए का आइकन संग्राम सिंह ब्यूनस आयर्स में इतिहास रच रहा था। उन्हें अर्जेंटीना में एमएमए फाइट जीतने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल हुआ। उम्र में 16 साल छोटे फ्रांस के फाइटर फ्लोरियन काउडियर को उन्होंने यहां बयूनस आयर्स के खचाखच भरे टिगरे स्पोर्ट्स क्लब स्टेडियम में महज एक मिनट 45 सेकंड में धराशायी कर दिया। तिबस्ली (जॉर्जिया) और एम्स्टर्डम (नीदरलैंड) में जीत के बाद उन्होंने एमएमए में जीत की हैट्रिक भी पूरी कर ली। इस फाइट में उन्हें कुश्ती के दांव पेंचों का काफी फायदा हुआ।

जीत के बाद रिंग पर दिए उनके एक बयान से पूरा एमएमए एरिना तालियों के शोर से गूंज उठा। दोहरे कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैम्पियन संग्राम सिंह ने कहा कि मेरे लिए जीत-हार कोई मायने नहीं रखती। मैं या तो जीतता हूं या सीखता हूं। मैं अक्सर कहता हूं कि पैशन की कोई उम्र नहीं होती। जैसा कि प्रधानमंत्रीजी अक्सर कहते हैं कि ऊंचे सपने देखो और उनको साकार करने में जुट जाओ। मेरा भी अर्जेंटीना में फाइट जीतने पर पहले भारतीय बनने का सपना साकार हुआ। उन्होंने आयोजकों के साथ ही अपने कोच भूपेश का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पिछले 25 साल से उनके साथ हैं। वह भी मुझे कामयाबी दिलाने में दिन-रात जुटे रहे। उन्होंने कहा कि जीत के बाद उन्हें देश विदेश से बधाई संदेशों का तांता लग गया। संग्राम सिंह प्रोफेशनल कुश्ती में वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियन भी रह चुके हैं।

खेल मंत्रालय की फिट इंडिया मूवमेंट के ब्रैंड एम्बेसडर संग्राम सिंह ने कहा कि इस बार हालात उनके लिए काफी मुश्किल थे। कॉम्पीटिशन से दो दिन पहले उनका वजन निर्धारित सीमा से 600 ग्राम अधिक था। दिन भर उन्होंने अपने कोच के साथ कड़ी मेहनत की। खूब पसीना बहाया। दिन भर में आधा गिलास पानी पीया। संग्राम सिंह 83 किलो वजन में उतरे जहां दो किलो की छूट थी। संग्राम सिंह ने कहा कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से बड़ा दबाव महसूस कर रहे थे। इस अवसर पर मौजूद भारतीय राजदूत और उनके बेटे ने भी इस जीत के बाद बेहद भावुक होकर उन्हें बधाई दी। उस समय पूरा स्टेडियम शोर से गूंज उठा था। स्टेडियम के एक कोने से भारत माता की जय के भी नारे लग रहे थे। संग्राम ने कहा कि मुझे भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि पूरा स्टेडियम मेरी फाइट के दौरान मुझे ही क्यों चीयर-अप कर रहा है।

मुकाबले के शुरू में संग्राम के एक पंच को फ्लोरियन ने अपने चेहरे पर लगने से बचा लिया। वह पंच उनके कंधे पर लगा। इसके जवाब में फ्लोरियन ने पसलियों पर किक से प्रहार किया। वहीं संग्राम की ओर से भी भी किक से ही जवाबी हमला देखने को मिला। संग्राम ने कहा कि फ्लोरियन दिखने में तगड़े ज़रूर थे लेकिन उनके हाथ-पैर काफी तेज़ी से चल रहे थे। संग्राम ने कहा कि आखिरकार कुश्ती का उनका अनुभव काम आया। फ्लोरियन की किक को पकड़कर उन्होंने नीचे गिराया। यानी उन्हें कुश्ती के लेग अटैक का फायदा मिला। फिर नीचे आकर उन्होंने सांडी तोड़ने की कोशिश की और फिर उन्हें लम्बा करके चोक कर दिया। रेफरी के तीन बार पूछने पर आखिरकार फ्लोरियन ने अपनी हार मान ली।

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