बीजापुर , अप्रैल 03 -- छत्तीसगढ के बीजापुर में ग्राम पंचायत संगमपल्ली में प्रस्तावित अंग्रेजी शराब दुकान के विरोध में ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर कड़ा विरोध जताया। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और गांव में शराब दुकान खोले जाने के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त की।
ग्रामीणों ने कहा कि छोटे गांवों में शराब दुकान खुलने से आदिवासी क्षेत्रों के युवा नशे की गिरफ्त में आ जाएंगे, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ग्रामीणों ने मांग की कि संगमपल्ली में शराब दुकान खोलने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा व्यापक विरोध किया जाएगा।
विधायक मंडावी ने बैठक में कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बिना उचित प्रक्रिया अपनाए शराब दुकानें खोली जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में न तो ग्राम सभा की सहमति ली गई और न ही दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी की गई, जो नियमों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि बीजापुर जिला संविधान की पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा) लागू है, इसके बावजूद ऐसे निर्णय लेना उचित नहीं है। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।
विधायक ने कहा कि सरकार को गांवों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा युवाओं को रोजगार देने पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन इसके बजाय शराब दुकानों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में बस्तर संभाग के युवा अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं।
बैठक में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष लालू राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि और आसपास के गांवों के ग्रामीण मौजूद थे। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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