रांची , जून 17 -- झारखंड के प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर कहा यह बताना चाहिए कि दो दिनों से उन्होंने अपने विधायकों को नजरबंद करके क्यों रखा है।

कांग्रेस पर आरोप लगाने से पहले उन्हें खुद देखना चाहिए कि उनके राष्ट्रीय नेतृत्व में कितनी छटपटाहट है। पूरे देश में दलों को तोड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी आज झारखंड में अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रही है। राज्यसभा के निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देने के कारण भाजपा के आधा दर्जन विधायक नाराज हैं, जिसका परिणाम मतदान के दौरान और बाद में मतगणना के दौरान देखने को मिल जाएगा।

भाजपा के तमाम विधायक चुनाव का परिणाम जान रहे हैं लेकिन इसके बावजूद जबरन मुस्कुराना उनकी मजबूरी है। पूंजीपतियों के सहारे देश की सत्ता चलाने वाली भाजपा झारखंड में एक सीट के लिए बेचैनी के दौर से गुजर रही है, झारखंड बीजेपी के नीति निर्माताओं कि शाख दांव पर है जो निश्चित रूप से धूल में मिलेगी।

श्री शांति ने कहा कि हमारे पोलिंग एजेंट हमारे पूरे संगठन को देखने वाले हमारे प्रभारी हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार ही आयातित है। महागठबंधन के सारे विधायक एकजुट हैं और लगातार कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कांग्रेस के विधायकगण और झारखंड प्रभारी के राजू, केशव महतो कमलेश, राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन, अजय शर्मा, बेला प्रसाद, भूपेंद्र मरावी बैठक कर रहे हैं।

होटल बी एन आर में किसी भी कांग्रेसी कार्यकर्ता और आम लोगों का प्रवेश निषेध नहीं किया गया है जबकि भाजपा ने मीडिया कर्मियों के साथ-साथ अपने कार्यकर्ताओं के लिए भी होटल रेडिएशन ब्लू में नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया है। झारखंड में राजनीतिक उथल-पुथल का सपना देखने वाली भाजपा को करारा जवाब राज्यसभा के चुनाव में दोनों सीटों के हार के माध्यम से मिलेगा। झारखंड पूरे देश में या संदेश देगा की झारखंडी किसी पूंजीपति के समर्थन में खड़ा नहीं रहेगा बल्कि वह झारखंड के अस्मिता और स्वाभिमान के साथ हमेशा खड़ा रहेगा।

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