मुम्बई , अगस्त 28 -- भाई-बहन के अटूट स्नेह को प्रदर्शित करने वाले रक्षाबंधन के गीत श्रोताओं को बेहद पसंद आते हैं। हिन्दी फिल्मों में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शाते हुए कई ऐसे गीत रचे गए हैं, जो दशकों बाद भी लोगों की जुबां पर हैं और रक्षाबंधन के अवसर पर इनकी लोकप्रियता और बढ़ जाती है।

निर्माता एल. वी. प्रसाद की वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'छोटी बहन' संभवतः पहली ऐसी फिल्म थी, जिसमें भाई-बहन के प्यार भरे अटूट रिश्ते को रूपहले पर्दे पर दिखाया गया था। इस फिल्म में बलराज साहनी ने बड़े भाई और नंदा ने छोटी बहन की भूमिका निभायी थी। शैलेन्द्र के लिखे और लता मंगेशकर द्वारा गाये फिल्म के गीत 'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना' को बेहद लोकप्रियता मिली। रक्षाबंधन के गीतों में इस गीत का विशिष्ट स्थान आज भी बरकरार है।

निर्माता-निर्देशक ए. भीम सिंह ने भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित दो फिल्में 'राखी' और 'भाई बहन' बनायीं। वर्ष 1962 में रिलीज हुई 'राखी' में अशोक कुमार और वहीदा रहमान ने भाई-बहन की भूमिका निभायी थी। वर्ष 1968 में प्रदर्शित 'भाई बहन' में सुनील दत्त और नूतन मुख्य भूमिकाओं में थे।

इसी दौर में 'अनपढ़' और 'काजल' जैसी फिल्मों में भाई-बहन के पवित्र प्रेम पर आधारित दो खूबसूरत गीत पेश किए गए। फिल्म 'अनपढ़' में माला सिन्हा पर लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गया गीत 'रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना' आज भी दर्शकों और श्रोताओं को अभिभूत कर देता है। फिल्म में बलराज साहनी भाई की भूमिका में थे।

फिल्म 'काजल' में मीना कुमारी पर बेहद खूबसूरत गीत 'मेरे भइया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन' फिल्माया गया था। रवि के संगीत निर्देशन में इस गीत को पार्श्वगायिका आशा भोंसले ने अपना स्वर दिया था।

विमल राय की फिल्म 'बंदिनी' में भी एक बेहद मार्मिक गीत था, जिसमें बहन अपने पिता से भाई को सावन में भेजने का अनुरोध करती है,'अब के बरस भेज भइया को बाबुल, सावन में दीजो बुलाय रे।' बहन की व्यथा को बयां करने वाले शैलेन्द्र के लिखे और एस. डी. बर्मन के स्वरबद्ध इस गीत को भी आशा भोंसले ने अपना कर्णप्रिय स्वर दिया था।

वर्ष 1971 में रिलीज हुई फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' में देवानंद और जीनत अमान ने भाई-बहन की भूमिका निभायी थी। फिल्म का गीत 'फूलों का तारों का, सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है' आज भी सदाबहार गीतों में शामिल है। भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरती को बयां करने वाला यह गीत रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष रूप से पसंद किया जाता है।

'रेशम की डोरी' में सुमन कल्याणपुर का गाया गीत 'बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है' रक्षाबंधन पर आज भी रेडियो पर खूब बजता है। यह गीत भाई-बहन के स्नेह और राखी के महत्व को बेहद भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करता है।

इसी तरह फिल्म 'बेईमान' का गीत 'ये राखी बंधन है ऐसा', 'सच्चा झूठा' का 'मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया', 'चंबल की कसम' का 'चंदा रे मेरे भइया से कहना', 'प्यारी बहना' का 'राखी के दिन', 'हम साथ साथ हैं' का 'छोटे छोटे भाइयों के', 'तिरंगा' का 'इसे समझो न रेशम का तार' और 'रिश्ता कागज का' का 'ये राखी की लाज तेरा भइया निभायेगा' जैसे गीत भी काफी लोकप्रिय हुए।

समय के साथ फिल्मों के विषय और संगीत का अंदाज भले ही बदल गया हो, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित इन गीतों की लोकप्रियता आज भी कम नहीं हुई है। रक्षाबंधन आते ही रेडियो, टेलीविजन और संगीत मंचों पर इन गीतों की गूंज सुनायी देने लगती है। इन गीतों में भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, त्याग और भावनात्मक जुड़ाव की ऐसी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है, जो हर पीढ़ी को अपनेपन का एहसास कराती है।

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