अमृतसर , जुलाई 30 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने गुरुवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब के बेअदबी रोकथाम कानून को लेकर पंजाब सरकार द्वारा भेजे गये जवाब को असंतोषजनक बताते हुए खारिज कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जतायी गयी सिख भावनाओं के अनुरूप कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए तैयार नहीं है। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों के साथ बनी सहमति की भावना सरकार के जवाब में कहीं भी दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल एक आपत्ति को स्वीकार किया है, जबकि अन्य सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने पुराने रुख पर कायम रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जवाब भेजने से पहले समय रहते किसी तरह का संवाद स्थापित करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने घोषणा की कि यदि सरकार इस कानून पर आगे बातचीत करना चाहती है तो श्री अकाल तख्त साहिब ने इस उद्देश्य के लिए छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है।

समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रुपिंदर सिंह सोढ़ी, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मोहिंदर मोहन सिंह बेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पूरन सिंह हुंदल, सिख विद्वान डॉ. केहर सिंह पटियाला, प्रो. जगमोहन सिंह लुधियाना तथा एसजीपीसी चंडीगढ़ कार्यालय के सचिव लखवीर सिंह को संयोजक बनाया गया है। उन्होंने सरकार से दो माह के भीतर समिति के साथ संवाद कर सर्वसम्मति बनाने का आग्रह किया।

जत्थेदार ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बातचीत के द्वार खुले हैं, लेकिन सरकार को स्पष्ट नीयत के साथ आगे बढ़ना चाहिए और किसी प्रकार की चालाकी से बचना चाहिए।

ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में सभी सिख विधायकों और मंत्रियों ने अरदास के बाद दोनों हाथ उठाकर आपत्तिजनक प्रावधान हटाने पर सहमति जतायी थी, लेकिन सरकार के जवाब में कस्टोडियन (संरक्षक) संबंधी दोनों धाराओं को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके विपरीत सरकार ने नियम बनाने का हवाला देकर इन प्रावधानों का बचाव किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार के प्रतिनिधि अपनी सहमति से पीछे हटते हैं तो श्री अकाल तख्त साहिब इस मामले का गंभीर नोटिस लेकर उचित कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का अधिकार केवल बेअदबी के दोषियों के लिए कठोर सजा निर्धारित करने तक सीमित है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के कस्टोडियन का निर्धारण करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और धर्म के मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जत्थेदार ने कहा कि सरकार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र बीड़ों को विशिष्ट नंबर देने, उनका रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड करने या केंद्रीय रजिस्टर बनाने का अधिकार भी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एसजीपीसी का आंतरिक प्रशासनिक विषय है और इसके लिए संस्थान के पास पहले से व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने सरकार के जवाब में डेरा प्रमुख को कस्टोडियन मानने संबंधी व्याख्या को भी गंभीर त्रुटि बताया और कहा कि कानून के अनुसार कस्टोडियन वही व्यक्ति होता है, जिसके पास पवित्र बीड़ होती है। ऐसे में बेअदबी के लिए उकसाने वाले व्यक्ति को कस्टोडियन बताना कानून की गलत व्याख्या है।

जत्थेदार ने कहा कि सरकार ने बेअदबी मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन इसका स्पष्ट प्रावधान कानून में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पंजाब विधानसभा के सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों को निर्देश दिया कि तीन अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में तब तक बेअदबी विरोधी कानून पर कोई चर्चा न होने दें और न ही किसी नये संशोधन को मंजूरी दें, जब तक इस मुद्दे पर श्री अकाल तख्त साहिब और एसजीपीसी के साथ सर्वसम्मति नहीं बन जाती।

जत्थेदार ने कहा कि सरकार बताये कि वह किन 'गुप्त सलाहकारों' से सलाह ले रही है। उन्होंने कहा कि उनका मोबाइल फोन हमेशा चालू रहता है और सरकार चाहती तो किसी भी समय उनसे संपर्क कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा 2015 के बेअदबी मामलों में सिखों को न्याय दिलाना है। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को गिरफ्तार कर पंजाब लाने, बरगाड़ी बेअदबी मामले के आरोपियों को सजा दिलाने, पंजाब से बाहर स्थानांतरित मामलों को वापस लाने तथा मौर बम विस्फोट मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में जत्थेदार ने कहा कि सभी सिख विधायक अपने अंत:करण के अनुसार आचरण करें। उन्होंने कहा कि विधानसभा सर्वोच्च है, मुख्यमंत्री नहीं। इसलिए विधायक मुख्यमंत्री से दूरी बनाये रखें, उनसे कोई संवाद न करें और सदन में केवल अध्यक्ष को संबोधित करते हुए अपनी बात रखें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित