चेन्नई , अक्टूबर 02 -- तमिलनाडु में तिरुचि शहर पुलिस की केन्द्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने श्रीरंगम श्री रंगनाथस्वामी मंदिर ज़मीन धोखाधड़ी मामले में मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के एक पदाधिकारी को गिरफ्तार किया है।
सीसीबी पुलिस ने द्रमुक के श्रीरंगम क्षेत्रीय सचिव एन. रामकुमार को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के बाद गुरुवार शाम तिरुचि-मदुरै हाईवे पर पंजापुर के पास गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 15 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पलानी भगवान धनदायुथपानी मंदिर और मदुरै मीनाक्षी मंदिर ज़मीन विवाद के बाद यह तीसरा धोखाधड़ी वाला मंदिर ज़मीन सौदा है जो सामने आया है। जिस ज़मीन को धोखाधड़ी से पंजीकृत किया गया था, वह श्रीरंगम में दुनिया भर में मशहूर भगवान श्री रंगनाथस्वामी मंदिर की थी।
मंदिर के संयुक्त आयुक्त एस शिवरामकुमार की शिकायत पर 13 सितंबर को रामकुमार समेत छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और 2022-23 में ज़मीन की धोखाधड़ी में शामिल होने के साथ-साथ आपराधिक साज़िश, जालसाज़ी वगैरह के आरोप में मामले दर्ज किए गए। उन पर भादसं की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर की ज़मीन का वह हिस्सा जिसे धोखे से स्थानांतरित और पंजीकृत किया गया था की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये बतायी गयी थी जो मंदिर की 5.87 एकड़ की बड़ी सम्पति का हिस्सा था।
पुलिस ने बताया कि विवादित ज़मीन पर अभी रामकुनार का द्रमुक कार्यालय चल रहा था। साथ ही चार निजी लोगों ने ज़मीन का मालिक होने का दावा करते हुए नकली कागज़ात का इस्तेमाल करके रामकुमार के नाम पर गैर-कानूनी तरीके से इसे पंजीकृत कराया था, जबकि उन्हें पूरी तरह पता था कि ज़मीन का टुकड़ा श्रीरंगम मंदिर का है। बताया जा रहा है कि ज़मीन के कथित स्थानांतरण में दो करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम दी गई थी।
प्राथमिकी में आरोप है कि चेन्नई के पद्मा रेंगराजन और बेंगलुरु के विजया कृष्णसामी ने जमीन पर अपना हक बताते हुए दिसंबर 2022 में रामकुमार को ज़मीन 1.45 करोड़ रुपये में बेच दी। बाद में पद्मा रेंगराजन और विजया कृष्णसामी के भाई आर. सुंदरराजन ने सम्पति में हिस्सा लेने का दावा किया और 72.5 लाख रुपये लेकर रामकुमार के पक्ष में बिक्री संबंधी डीड कर दी। बाद में वेंकट वर्धन नाम के एक और व्यक्ति ने भी हिस्सा लेने का दावा किया और रामकुमार के पक्ष में 72.5 लाख रुपये में एक और सेल डीड कर दी गई।
प्राथमिकी के मुताबिक तीनों लेन-देन में कुल 2.9 करोड़ रुपये का सौदा हुआ। पुलिस ने आरोप लगाया है कि आरोपी जानते थे कि सम्पति मंदिर की है और उन्होंने निजी मालिकाना हक दिखाने वाले दस्तावेज बनाने के लिए आरोपी के साथ मिलीभगत की। उस समय के उप पंजीयक ने कथित तौर पर सम्पति से जुड़े लेन-देन पर मंदिर प्रशासन से आपत्ति जताने वाले संदेश मिलने के बावजूद बेचान और सुधार विलेख पंजीकृत कर लिया था।
हालांकि, रामकुमार ने किसी भी गलत काम से इनकार किया और दावा किया कि ज़मीन निजीलोगों की थी और उप-पंजीयक के दस्तावेज सत्यापित करने के बाद पंजीकरण ठीक से किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह विवाद पहले से ही मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के सामने लंबित था और सवाल किया कि जब मामला अदालत में था तो पुलिस शिकायत क्यों की गई।
तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर और सीई) मंत्री एस. रमेश ने कहा कि उन्हें जनता से कई शिकायतें मिली हैं, जिसमें कहा गया है कि रामकुमार ने मंदिर की ज़मीन का एक हिस्सा गैर-कानूनी तरीके से अपने नाम पर स्थानांतरित कर लिया था और उसे अपने पार्टी कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे।
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