श्रीनगर , सितंबर 02 -- श्रीनगर में बुधवार को जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला, जब सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन किये।

इस दौरान दोनों दलों ने जम्मू-कश्मीर की जनता के प्रति एक-दूसरे के ट्रैक रिकॉर्ड और रवैये को लेकर तीखे हमले बोले।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लाल चौक स्थित घंटाघर से सिविल सचिवालय की ओर मार्च निकाला और उमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत शर्मा तथा नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के नेतृत्व में निकला यह मार्च लगभग आधा किलोमीटर आगे बढ़ा, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जहांगीर चौक पर रोक दिया।

भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने मार्च को सिविल सचिवालय की ओर आगे नहीं बढ़ने दिया। भाजपा नेताओं का एक छोटा समूह हालांकि किसी तरह सचिवालय के करीब पहुंचने में कामयाब रहा।

अधिकारियों ने कहा कि श्रीनगर में आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं था। इस बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राजबाग में जवाबी प्रदर्शन किया और भाजपा मुख्यालय की ओर मार्च करने की योजना बनायी। सत्तारूढ़ दल ने आरोप लगाया कि उसके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोका गया और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ बदसलूकी की गयी।

नेकां ने कहा, "लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका गया और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। फिर भी, जब भाजपा ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया, तो उसे आगे बढ़ने की अनुमति दी गयी। यह बेहद शर्मनाक है!" सत्तारूढ़ दल ने प्रशासन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रदर्शनों के प्रति दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा, "दो प्रदर्शनों की अलग-अलग कहानी है। एक को खुली छूट और पूरी सुविधा दी गयी, जबकि दूसरे को रोका गया और कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की गयी। प्रशासन एक ही है, लेकिन रवैया अलग-अलग है।"जम्मू-कश्मीर में मिश्रित व्यवस्था के तहत शासन चल रहा है, जहां चुनी हुई सरकार अधिकतर विभागों पर अधिकार रखती है, जबकि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन के पास हैं।

नेकां के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने कहा कि उनकी पार्टी के प्रदर्शन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की जनता से किये गये वादों की ओर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करना था। प्रदर्शन में शामिल जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इतू ने कहा कि नेकां शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से जम्मू-कश्मीर के अधिकारों की बहाली के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा के प्रदर्शन में मदद की, जबकि नेकां कार्यकर्ताओं को अपने सभा स्थल तक पहुंचने से रोका। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "नेकां अनुच्छेद 370 से जुड़ी संवैधानिक गारंटियों और पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।" उन्होंने कहा कि 2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद ये मांगें पार्टी की राजनीति का मुख्य केंद्र रही हैं।

उधर, नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भाजपा के प्रदर्शन को 'सरकार की विफलताओं का प्रतिबिंब' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की समस्याओं का समाधान न होने के कारण उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने शुरू में 'छोटे' प्रदर्शन की योजना बनायी थी, लेकिन भारी संख्या में जुटी भीड़ जनता की चिंताओं और नाराजगी को दर्शाती है।

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