श्रीगंगानगर , अप्रैल 03 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले में इस समय गेहूं की फसल बड़ी मात्रा में तैयार हो चुकी है और किसान अपनी उपज मंडियों और बाजारों में लाना शुरू कर चुके हैं, जबकि सरकारी स्तर पर गेहूं खरीद की जो व्यवस्था बनाई जा रही है, उसमें भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य खरीद एजेंसियां निर्धारित समय प्रणाली के माध्यम से खरीद करने की बात कर रही हैं।
जानकारों ने बताया कि यह व्यवस्था श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे अधिक उत्पादन वाले जिलों में बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं मानी जा रही है। इन दोनों जिलों में राज्य के अन्य जिलों की तुलना में गेहूं का उत्पादन कहीं अधिक होता है। ऐसे में निर्धारित समय प्रणाली लागू करने से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
निर्धारित प्रणाली के कारण किसान समय पर अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे, जिससे मंडियों में भीड़ बढ़ेगी और तुलाई और उठाव के काम में काफी देरी होगी। साथ ही बारदाने की कमी भी गंभीर समस्या बन गई है। नतीजतन किसानों को मजबूरी में अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ सकती है। इससे सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि मजदूर, आढ़ती, व्यापारी और परिवहन से जुड़े लोग भी प्रभावित होंगे।
इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा ने शुक्रवार को श्रीगंगानगर में मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित करके तुरंत कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने मांग की है कि गेहूं की सरकारी खरीद तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी जाए। साथ ही पंजीकरण की बाध्यता और निर्धारित समय प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और महज गिरदावरी के आधार पर गेहूं की खरीद की जाए। किसानों को गेहूं पर 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाए। जिले में बारदाना की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और गत दिवस हुई अतिवृष्टि एवं ओलावृष्टि से हुए नुकसान का अतिशीघ्र प्रशासनिक सर्वे कराकर खराबे की भरपाई की जाए।
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