जयपुर , दिसम्बर 09 -- राजस्थान में दौसा की विशिष्ट केंद्रीय कारागृह श्यालावास में बंदियों के भीतर छिपी रचनात्मक ऊर्जा मंगलवार को एक भव्य कलाकृति के रूप में सामने आई।
जेल अधीक्षक पारस जांगिड की प्रेरणा से बंदियों ने प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस दस दिसंबर को समर्पित करते हुए जेल परिसर के उद्यान क्षेत्र में एक अत्यंत सुंदर और प्रतीकात्मक सैंड आर्ट का निर्माण किया। यह कलाकृति राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, उसके जीवंत रंगों और गौरवशाली इतिहास को एक अनूठे रूप में प्रदर्शित करती है।
इस आकर्षक सैंड आर्ट में दिवस के लोगो के अनुरूप राजस्थान की पहचान माने जाने वाली पारंपरिक झरोखा शैली को प्रमुखता से उकेरा गया है। इसके साथ ही कलाकृति में राज्य का स्पष्ट नक्शा, रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों की आकृतियां तथा अनेक रंग-बिरंगे सांस्कृतिक प्रतीकों को अत्यंत बारीकी और कुशलता से दर्शाया गया है। बंदियों ने इस कलाकृति के निर्माण के लिए मिट्टी, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का ही उपयोग किया, जो उनकी रचनात्मकता और सकारात्मक परिवर्तन की भावना को दर्शाती है।
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